श्री भगवद गीता से सीखें सही निर्णय कैसे लें? 10 Decision Making Lessons from Shri Bhagvad Gita

10 Decision Making Lessons from Shri Bhagvad Gita in Hindi

10 Decision Making Lessons from Shri Bhagvad Gita: दोस्तों हम सभी को लाइक में डिसीजन लेने होते हैं, यह डिसीजन हमारी लाइफ को दिशा देते हैं। सही डिसीजन हमें धरती पर से आकाश पर ले जाते हैं, और गलत डिसीजन हमें आकाश पर से धरती पर ला सकते हैं। भगवान श्री कृष्ण श्री भगवत गीता में डिसीजन लेने के कुछ टिप्स या लेसन दिए हैं 10 Decision Making Lessons from Shri Bhagvad Gita. हो सकता है आप में से कुछ लोग श्री भागवत गीता को केवल एक धार्मिक किताब ही मानते हो, पर सच यह है की श्रीमद्भागवत गीता एक ऐसी बुक है जो आपके जीवन को एक सही दिशा दे सकती है। दोस्तों मेरी गिनती भी कुछ दिन पहले उन मूर्खों होती थी जो श्रीमद भगवत गीता को एक साधारण सी बुक मानते थे।

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दोस्तों इस पोस्ट में मैं आपको सिर्फ वह बातें बताऊंगा जो आपकी लाइफ में डिसीजन लेने में मदद करेंगी। और यकीन मानिए 5000 साल पहले बताई गई श्री भगवत गीता में लिखी गई यह बातें आज भी उतनी ही सच्ची हैं। 10 Decision Making Lessons from Shri Bhagvad Gita.

दोस्तों पोस्ट शुरू करने से पहले हम आप सभी से विनम्र निवेदन करना चाहेंगे कि आप हमारे इस पोस्ट को किसी और पोस्ट के साथ कंपेयर (तुलना) मत कीजिए। मैंने आज तक जितनी भी बुक्स पड़ी हैं श्री भागवत गीता उनमें से सर्वश्रेष्ठ है। आप इसे किसी भी बुक से कंपेयर नहीं कर सकते। असल बात यह है जब आप भगवत गीता को पढ़ना शुरू करते हो तो आपको बाकी के बुक श्रीमद भगवत गीता की कॉपी लगती है। दोस्तों मै हर बुक और उनके लेखक की सम्मान करता हूं। पर मेरी नजर में इन सब से महान है श्रीमद भगवत गीता।

तो चलिए जानते हैं कि श्रीमद्भगवद्गीता कैसे हमें डिसीजन लेने में मदद करती है? 10 Decision Making Lessons from Shri Bhagvad Gita

सबसे पहले मैं आपसे पूछना चाहूंगा की आपको एक चीज अच्छा फील कर आ रही है, और दूसरी चीज आपको बुरा फील कर आ रही है। तो आप किसको सेलेक्ट करोगे। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ज्यादातर लोग का जवाब होगा कि जो चीज अच्छा फिल कर आ रही है वह उसी को चुनेंगे।

अर्जुन युद्ध नहीं लड़ना चाहते थे। क्योंकि अर्जुन को भाई और गुरु के साथ साथ अपने सगे संबंधी को युद्ध में खोने डर था। मगर भगवान श्री कृष्णा ने अर्जुन को युद्ध लड़ने का मार्ग दिखाया।

दोस्तों हमें कोई भी डिसीजन अपने फीलिंग के बेस पर नहीं लेना चाहिए, क्योंकि हमारी फीलिंग्स कुछ समय के लिए है। यही है फर्स्ट लेसन

Lesson-1   

Feelings are temporary, naver take decision on the basis of your feelings.

मॉडर्न वर्ल्ड में देखते हैं कि एक स्टूडेंट को मूवी देखना अच्छा फील कराता है पर पढ़ना नहीं इसलिए फीलिंग्स को इग्नोर करो। जिस डिसीजन से आपको अच्छा फील हो, वह जरूरी नहीं कि सही ही हो

श्रीमद भगवत गीता के चैप्टर 6 में भगवान श्री कृष्ण कहते है कि अपने दिमाग को कंट्रोल (बैलेंस) करके चलना चाहिए। इसलिए आप अपना कोई भी जरूरी निर्णय (डिसीजन) तब मत लें, जब आप बहुत ज्यादा खुश हैं या फिर जब आप बहुत ज्यादा दुखी हैं। ज्यादा खुश या फिर ज्यादा दुखी स्थिति में लिया गया डिसीजन अर्थात निर्णय गलत ही साबित होता है। 10 Decision Making Lessons from Shri Bhagvad Gita.

आपने अक्सर देखा होगा कि लोग जब बहुत ज्यादा खुश होते हैं तब आप उनसे कुछ भी मांग लो तो वह दे देते हैं। और लोग जब बहुत ही ज्यादा दुखी होते हैं तो वह इससे कुछ उलट करते हैं। आप उनका हाल भी पूछ लो लोग उसका भी बुरा मान लेते हैं। एक्चुली में ज्यादा खुश या ज्यादा दुखी होने पर हमारा दिमाग कुछ नॉर्मल से अलग रिएक्ट करता है। इसी कारण से ज्यादा खुशी या ज्यादा दुखी वाले टाइम पर लिया गया डिसीजन पर हमें पछताना पड़ सकता है। और यही है दूसरा लेसन

Lesson-2

Avoid Decision When In Extreme Emotions

Lesson-3

Ask yourself  “Am I Taking This Decision in Anger or Attachments”.

अर्थात आप कोई भी डिसीजन लेते वक्त आप अपने आप से पूछें की कहीं यह डिसीजन मैं क्रोध या अटैचमेंट (लगाओ) की वजह से तो नहीं ले रहा हूं।

दोस्तों कुछ सालों पहले लिखी गई एक बुक “7 Habits of Highly Effective People ”  जो कि एक बेस्ट सेलर बुक रही है, इस बुक में भी कुछ ऐसा ही बताया गया है। पर यह बात श्रीमद्भगवद्गीता में तो 5000 साल पहले ही भगवान श्री कृष्ण के द्वारा लिख दिया गया था। तो अपना डिसीजन लेने से पहले जरा सोचिए की मैं यह डिसीजन अर्थात निर्णय क्रोध या मोह मे तो नहीं ले रहा हूँ। “मोह” से मतलब है की यह मेरा भाई है तो मैं इसके लिए ज्यादा भावुक हो जाऊं। और इसी तरह क्रोध और लगाओ में लिया गया डिसीजन के कारण लोग आजकल मर्डर तक कर देते हैं।

Lesson-4

Am I Focusing Only One The Results.

अगर आप श्रीमद्भगवद्गीता को पढ़ें तो उसमें आपको एक शब्द बार बार दोहराया गया है वह शब्द है निष्काम कर्म। कर्म करिए फल की चिंता मत करिए। यही है असली कर्म योगी होने की निशानी। अब आप सोचिए आपने कितने ही अच्छे काम करने छोड़ दिए जब आपको रिजल्ट नहीं मिला। उदाहरण के लिए आप कुछ दिन तो मॉर्निंग वॉक करने गए, लेकिन जब आपका वेट लॉस नहीं हुआ तो आपने मॉर्निंग वॉक पर जाना छोड़ दिया। तो डिसीजन लेने वक्त याद रहे की आपको अपना कर्म करना है, अच्छे से, रिजल्ट्स या फिर फल की चिंता किए बगैर। आप तो बस लगे रहो। फल आपके हाथ में नहीं है, लेकिन कर्म करना आपके हाथ में हैं।

दोस्तों श्रीमद्भागवत गीता में लिखा गया है की बदलाव से मत डरे। अगर आपके डिसीजन लेने से बदलाव आ रहा है तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है। आप एक चीज से कंफर्टेबल हो जाते हैं, आपको जरूरत है इस कंफर्ट जोन से बाहर आकर सोचने की। 10 Decision Making Lessons from Shri Bhagvad Gita.

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युद्ध लड़ना अर्जुन के लिए नई चीज है और वह इसके लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन बदलाव तो आना ही है, और इसकी जरूरत भी है। अर्जुन के दिमाग में यह जो डर है कि वह युद्ध लड़ कर अपनों को खो देंगे, यह गलत है। यही है अर्जुन का कंफर्ट जोन, और इसी से बाहर निकलने में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन की मदद करते हैं।

दोस्तों श्रीमद्भागवत गीता के 17 चैप्टर के 28 श्लोक में एक बहुत ही प्यारी लाइन है इसमें कहा गया है कि “हम जो भी बिना आस्था के करते हैं वह सब बेकार है, और यही है 5th लेसन

Lesson-5

Whatever is Done Without Faith, Is Unless.

तो आप कोई भी डिसीजन लेने से पहले सोचें कि मुझे यह सही लग रहा है, क्या मैं इसमें स्ट्रांगली बिलीव और विश्वास कर सकता हूं? Believe और Faith दो ऐसे खंभे है, जिसके बिना आपका डिसीजन(निर्णय) लंगड़ा है। और थोड़ी देर बाद आप इस डिसीजन पर कायम ही नहीं रह पाओगे। इसलिए सही निर्णय लें और खुद पर और भगवान पर विश्वास रखें।

दोस्तों अब देखते हैं भगवत गीता के चैप्टर 3 के श्लोक 21 को

जो भी काम एक महान आदमी करता है उसको आम आदमी फॉलो करते हैं

Whatever Action A Great Man Performs, Common Man Follow.

अब जरा सोचिए हम सब श्रीकृष्ण को भगवान क्यों मानते हैं? क्योंकि उनके कर्म, और एक इंसान के कर्म में बहुत फर्क है। अगर साधारण शब्दों में कहा जाए तो…

श्री कृष्ण अपना स्टैंडर्ड या फिर अपने लक्ष्य को आदमी के लक्ष्य से कहीं ऊपर रखें है। और इसीलिए सारी दुनिया में उनकी पूजा होती है। और यही है लेसन 6

Lesson-6

Keep Your Goals High.

तो डिसीजन लेने से पहले आप सोचें कि कहीं मैंने अपना लक्ष्य बहुत कम तो नहीं रख लिया जो मैं आसानी से प्राप्त कर लूंगा। हमेशा आप अपनी सोच और लक्ष्य को बड़ा रखकर ही अपना निर्णय लें।

और चलिए दोस्तों अब बात करते हैं लेसन 7 की… दोस्तों भगवत गीता के चैप्टर 3 में भगवान श्री कृष्ण बताते हैं कि जो भी चीज समाज और सभी लोगों के लिए अच्छी नहीं है, वह आपके लिए अच्छी हो ही नहीं सकती।

अगर आपको लगता है कि यह काम करने से आप का तो भला होगा। पर इस काम को करने से दूसरों का नुकसान होगा तो, वह काम करने का डिसीजन मत लीजिए। और यही है 7th लेसन

Lesson-7

What is Good For The Society is Good For You.

दोस्तों श्रीमद भगवत गीता के 5th चैप्टर में श्री कृष्ण ने यह बात बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में कहीं है कि “जो भी व्यक्ति परमात्मा में विश्वास रखता है वह सुखी रहता है”

तो आप अपना कोई भी निर्णय लेते वक्त परमात्मा पर विश्वास रखिए और भगवान को याद कीजिए और यही है 8th लेसन

Lesson-8

Trust in The Lord.

दोस्त जरा सोचिए अर्जुन खुद भी ज्ञानी थे। मगर उलझन के समय उन्होंने अपनी समस्या पर विचार विमर्श किया आपने फ्रेंड भगवान श्री कृष्ण से। आप भी अपनी प्रॉब्लम अर्थात समस्या को कभी भी अपने मन में मत रखें। अगर आपकी लाइफ में कोई भी व्यक्ति है जो समझदार है. जिस पर आप भरोसा करते हैं की वह आपकी प्रॉब्लम को समझेगा। तो आप उससे अपनी प्रॉब्लम जरूर डिस्कस कीजिए, अर्थात उसे अपनी समस्या को बताइए। उसकी सलाह लीजिए। उदाहरण के लिए एक स्टूडेंट के लिए यह व्यक्ति टीचर, फ्रेंड या फिर उसके माता-पिता हो सकते हैं। याद रखें “सही परामर्श सही निर्णय लेने में मदद करती है” यही है लेसन 9

Lesson-9

Right Counseling Can Lead Better Decision.

और आपको एक राज की बात बताता हूं श्री भागवत गीता के पेज को पलटने से भी कई बार आपको अपनी प्रॉब्लम का सलूशन मिल जाता है। पर इस बात को सिर्फ वही समझ सकता है जिसने श्री भगवत गीता को पढ़ा हो।

असल में भगवत गीता को पढ़ते वक्त ऐसा फील होता है कि भगवान श्री कृष्ण आपको अपनी लाइफ के भीतर झांकने का मौका दे रहे हैं। दोस्तों मुझे भी अपने एक प्रॉब्लम का सलूशन ऐसे ही मिला था। और यही है लेसन 10

Lesson- 10

Read Sri Bhagwat Geeta.

तो यह था दोस्तों कुछ ज्ञान पूर्वक बातें जो कि श्री भागवत गीता से ली गई है। जीवन में निर्णय लेने में हेल्पफुल होगी। उम्मीद करता हूं आपको हमारा यह पोस्ट पसंद आया होगा। अगर आपको हमारा यह पोस्ट “श्री भगवद गीता से सीखें सही निर्णय कैसे लें? 10 Decision Making Lessons from Shri Bhagvad Gita” पसंद आया तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए, ताकि आपके माध्यम से यह ज्ञान और लोगों तक पहुंच सके। धन्यवाद॥

तो प्रेम से बोलिये जय श्री कृष्ण Jai Sri Krishna

 

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