बर्बरीक जो एक बाण से महाभारत समाप्त कर सकता था Barbaric Moral story

बर्बरीक जो एक बाण से महाभारत समाप्त कर सकता था Barbaric Moral story in Mahabharat

Barbaric Moral stories in Hindi: दोस्तों आज हम आपको अपने इस पोस्ट में  बर्बरीक(Barbaric) के बारे में बताएंगे जिसने अपने ताकत और अपने बल से प्रभु श्रीकृष्ण को भी अपने आगे झुका दिया था। आज मैं उनके बारे में थोड़ा सा आपको बताऊँगा, और साथ में इस चीज से हमें क्या सीखने को मिलता है इसके बारे में बात करेंगे।

Barbaric Moral story in Mahabharat

सबसे पहले मैं आपको बता दूं बर्बरीक(Barbaric) जो था वह घटोत्कच का बेटा और भीम का पोता था। जब महाभारत की लड़ाई शुरू हुई तोह श्री कृष्ण जी ने सब से महाभारत की लड़ाई खत्तम करने के बारे में पूछा। इसके लिए वह सबसे पहले भीष्म पितामह के पास गए उन्होंने उनसे पूछा कि आप इस लड़ाई को कितने दिन में खत्म कर देंगे, तो उन्होंने कहा 20 दिन। द्रोणाचार्य के पास गए और उनसे पूछा कि आप इस लड़ाई को कितने दिन में खत्म कर देंगे, उन्होंने कहा 25 दिन। कर्ण के पास गए उन्होंने कहा 24  दिन। अर्जुन के पास गए तो अर्जुन ने कहा 28 दिन में मैं महाभारत की लड़ाई खत्म कर दूंगा। Moral stories in Hindi

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उसके कुछ  दिनों बाद जब श्री कृष्ण बर्बरीक(Barbaric) से मिले तो उन्होंने उससे भी पूछा की तुम इस लड़ाई को कितने दिन में खत्म कर दोगे तो उसने बर्बरीक ने कहा, एक छन में एक मिनट में, मै यह लड़ाई खत्म कर दूंगा। यह बात सुन कर श्री कृष्ण बहुत आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने कहा कि यह कैसे हो सकता है? तो बर्बरीक(Barbaric) ने कहा कि मेरे पास ऐसी शक्तियां है, मैंने ऐसे तप किए हैं जिनसे मैंने बहुत अस्त्र शस्त्र हासिल किये हैं जिससे मैं एक छन में इस महाभारत को खत्म कर दूंगा।

श्री कृष्ण ने कहा कि चलो दिखाओ अगर की तुम ऐसे कैसे कर सकते हो। बर्बरीक(Barbaric) ने कहा की आपके सामने जो पेड़ दिख रहा है मैं इसमें जितने भी पत्ते हैं इसकी हर एक पत्ते में छेद कर दूंगा वो भी बस अपने एक वाण से। श्री कृष्ण ने कहा क्या, तुम ऐसा कर सकते हो? बर्बरीक(Barbaric) ने कहा हां…फिर श्री कृष्णा ने चुपके से एक पत्ता तोड़ के अपने पांव के नीचे दबा लिया। जब बर्बरीक ने उस पेड़ की तरफ तीर मारा तो  पेड़ की हर एक पत्ते में छेद हो गया। जब श्री कृष्णा ने अपने पांव हटाएँ तो वह देखते है की उनके पांव के नीचे जो पता था उसमें भी एक छेद हो चुका है।

श्री कृष्णा इस बात से बहुत डर जाते हैं फिर वह बर्बरीक(Barbaric) से पूछते हैं कि तुम इस महायुद्ध में किसका साथ दोगे? तो बर्बरीक कहता है कि जो पार्टी कमजोर होगी मैं हमेशा उसी का साथ दूंगा। श्री कृष्णा ने फिर पूछा कि चाहे वह अधर्म पर क्यों ना हो, उसने कहा हां। श्री कृष्ण ने कहा की बात कमजोर और बलवान कि नहीं होती बात यह होती है कि कौन धर्म पर है और कौन अधर्म पर। तुम्हे हमेशा धर्म का साथ देना चाहिए। बर्बरीक उस टाइम अपने चरम पे था उसने कहा ऐसा नहीं हो सकता, मैं हमेशा उसका साथ दूंगा जो कमजोर है।

तब श्री कृष्ण ने कहा तुमको इस महाभारत से दूर चले जाना चाहिए और तुम्हे इस लड़ाई में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। तब बर्बरीक(Barbaric) ने कहा है की “पंडित तुम मुझे ऐसा कैसे कह सकते हो” (क्योंकि श्री कृष्णा जी उस टाइम एक पंडित के रूप से बर्बरीक के पास आए हुए थे) । उसके सामने बर्बरीक ने गुस्से में अपना तीर उनके तरफ कर दिया। श्री कृष्णा ने अपने चक्र से उसका (बर्बरीक) गला काट दिया और जैसे ही  गला  धर से अलग हुआ बर्बरीक के आंखों से आंसू गिरने लगा। और उसने कहा प्रभु मैं तो पहले से ही जानता था की आप है। प्रभु मेरी तो यही इच्छा थी की मै आपकी हाथों से ही मरू। भगवान् श्री कृष्ण मुस्काने लगे। तब बर्बरीक(Barbaric) ने कहा कि मरी एक इच्छा है की मैं इस पूरे महाभारत को देखना चाहता हूं, तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया की इस युद्ध के शुरू से लेकर अंत तक तुम्हारा यह सर जीवित रहेगा। और तुम पूरे महाभारत को देख सकोगे।

और ऐसा ही हुआ महाभारत आरंभ हुआ, बर्बरीक अपने आंखों से पूरे महाभारत को देखता रहा। क्या सही, क्या गलत, कौन सत्य, कौन असत्य, कौन धर्म पे है, कौन धर्म पे है, सब कुछ बरबर्की का सर अपने आंखों से देखता रहा। महाभारत खत्म हुआ, युद्ध खत्म होने के पश्चात पांचो पांडव बर्बरीक के पास जाते  है उनके साथ श्री कृष्णा भी होते है। पांडव बर्बरीक(Barbaric) के कटे हुए सर से पूछते है.. की बताओ बर्बरीक तुमने  युद्ध क्या देखा है? इस युद्ध में कौन सा ऐसा वीर था जिसने सबसे ज्यादा अपना पराक्रम का परच्छा लहरा रहा है। बर्बरीक(Barbaric) मुस्कुराने लगे इस मुस्कुराहट से पांडवों को आश्चर्य हुआ। उसने कहा कि तुम मुस्कुरा क्यों रही हो। हमने इस युद्ध में विजय हासिल करी है तो बताओ हममे से किसने ज्यादा अपने शौर्य का प्रदर्शन किया है।

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युधिष्ठिर कहते हैं कि बताओ बर्बरीक तुमने ऐसा क्या सत्य देख लिया जो हम नहीं देख पाए। बर्बरीक कहते हैं कि हे धनुर्धर मैंने यह देखा की जब अर्जुन ने अपना बाण चलाया और भीष्म पितामह को लगा, तो उसके बाद श्री कृष्ण के चक्र ने उन्हें रथ से गिराया। मैंने यह देखा की जब कर्ण को अर्जुन ने अपनी तीर मारा, लेकिन कर्ण की मृत्यु श्री कृष्णा की चक्र से हुई। मैंने देखा की जितने भी सेना मरते गए वह वाण से नहीं मरे वह मरे श्री कृष्णा की चक्र से। इस पूरी युद्ध में अगर कोई वीर है, अगर कोई सत्य है तो वह श्री कृष्णा है। बर्बरीक ने कहा की यह जो युद्ध था वह कौरव और पांडवों के बीच नहीं था, वल्कि यह श्री कृष्ण और अधर्म के बीच युद्ध था, यह युद्ध सत्य और असत्य के बीच में था। इसमें पांडवों की जीत नहीं  हुई है, इसमें सत्य की जीत हुई है। यह फर्क नहीं पड़ता के तुम पांच थे और वह शो थे, फर्क यह पड़ता है कि तुम सत्य के तरफ थे और वह असत्य के तरफ थे।

दोस्तों यह बात बिल्कुल सही है अगर आपको लगता है की आप जीवन में सब कुछ कर सकते हैं, अगर आप सोचते हैं की आप ही थे जिसके वजह से ए चीज हो पाई, तो गलत है।

आप सिर्फ एक नमूना है आपके साथ बहुत सारे लोग होते हैं बहुत सारी चीजें जुड़े होते हैं। कोई सक्सेस मैन है, तो सिर्फ अपनी वजह से, वह सक्सेस है ऐसा मानना भी गलत है। उसके साथ बहुत सारे रिसोर्सेस है, उसकी फैमिली है, उसका घर है, आसपास का एनवायरनमेंट है। दोस्तों बर्बरीक से हमें यह सीखने को मिला कि अगर आप जीवन में जो कुछ बनना चाहते हैं, कुछ करना चाहते हैं, वह सिर्फ और सिर्फ हार्डकोर मेहनत और डेडीकेशन के वजह से ही हो सकता है। बर्बरीक(Barbaric) ने ठाना है कि श्री कृष्ण या प्रभु के हाथों से ही मरेगा तो उसने वही किया। बहुत सारे तप कीए बहुत सारे अस्त्र-शस्त्र लिए। सेम चीज हमारे लाइफ में भी अगर आप डेडीकेट होते हैं, की मुझे अपने बिजनेस में, अपने प्रोफेशन में, अपने स्टडी लाइफ में, कुछ करना है, कुछ बनना है तो वह चीज तभी पॉसिबल होगी जब आप इस चीज के लिए डेडीकेट रहेंगे। आप हर दिन अपने लिए छोटी सी डायरी लिखिए जिसमें नोट करिए की आज पूरे दिन में मैंने क्या कुछ किया। इसमें दो column जरूर होना चाहिए…

  1. क्या मैंने किया
  2. क्या मैंने नहीं किया

बाकी भगवत गीता, रामायण यह चीज हमें बहुत कुछ सिखाती है। अगर आप इस चीज को पढ़ना चाहेंगे तो जरूर पढ़िए। इसमें बताया गया कि सबसे पहले कृत युग आया जिसे आप सत्य युग कहते हैं, इसमें जो चीज लोग चाहते थे वह पूरा हो जाता था। उसके बाद त्रेता युग आया यहां पर लोग ‘योग’ करते थे जो चीज चाहिए उसके लिए योग करना पड़ता था। घोर तपस्या करते थे तब जाके वह चीज हासिल होता था। उसके बाद द्वापर युग आया यहां पर अधर्म बढ़ने लग गया, लोगों के मन में छल-कपट एक दूसरे के लिए  नफरत, यह सारी चीजें आने लग गए। उसके बाद कलयुग आया जिसमें हम सब जी रहे हैं।

तो दोस्तों बर्बरीक(Barbaric) के बारे में लिखा गया हमारा यह पोस्ट “Barbaric Moral story in Mahabharat” कैसा लगा। हमे आप कमेंट करके जरूर बताइएगा। धन्यवाद॥

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