आया होली का त्यौहार Beautiful Hindi poem on Holi

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Beautiful Hindi poem on Holi

कहे धरती ये पुकार
आया होली का त्यौहार
छोड़ सर्दी ली मौसम ने करवट
लेकर अंगड़ाई आई है होली
भेद-भाव को गिरा चले हम
बढ़ी दूरियां मिटा चले हम
गुलालों से तन है सजी
पकवानों से रसोई है सजी
बच्चे और नौजवानों की टोली
रंगों संग पिचकारी है बोली
बुरा ना मानो आई है होली
मिलकर गले भाईचारा बढ़ाएं
मेलजोल का पाठ पढ़ाएं
संग हमारे धरती भी खेल रही होली
धरती के सर पर चुनरी नीली नीली
पैरों तले हरियाली ओढे खेत पीली पीली
रंगों का यह मेल दिखाती
एक दूजे बिन अधूरा है सिखाती
जंग की रंगीन दुनिया में भी
दिल की चादर कोरी कोरी
तन संग मन भी भीग जाए
ऐसे रंग में रंग दे होली
अपनापन का रंग लगाकर
सुख के रंग भर दे तो खुश रंग है होली
प्रीत का ज्योत जलाकर
सबको मीत बना दे तो
झूम कर यह कह उठे दिल
हर दिन है सब की होली

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Poem By Archana Snehi

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