हिन्दी भाषा का जन्म कैसे हुआ था History of Hindi Language

History of Hindi Language in Hindi

History of Hindi Language in Hindi: हेलो दोस्तों नमस्कार, क्या आपके दिमाग में कभी यह सवाल उठा कि हमारे हिंदुस्तान की भाषा ‘हिंदी'(Hindi Language) कहां से आई, असल में हिंदी भाषा(Hindi Language) का इतिहास क्या है? कैसे बनी हमारे देश कि यह राष्ट्रभाषा? शायद आप यह नहीं जानते होंगे। कोई बात नहीं है चलिए आज हम बताते हैं आपको हिंदी भाषा(Hindi Language) के इतिहास के बारे में। हिंदी नाम हिंदू शब्द से लिया गया था सबसे पहले इस भाषा का प्रयोग उत्तर भारत से किया गया था, जहां आज उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड है।

History of Hindi Language

इतिहास के हिसाब से हिंदी भाषा(Hindi Language) लगभग 2000 साल पुरानी है। हिंदी भाषा(Hindi Language) की शुरुआत करीबन 1000  ईस्वी में की गई थी, करीबन 1000 ईस्वी से लेकर 1100 ईस्वी के बीच हिंदी भाषा का सिर्फ बोल-चाल का शुरुआत हुआ था। करीब 1500 इसवी तक लोग हिंदी भाषा(Hindi Language) अच्छी तरह से और साफ तरह से बोल लेते थे। 1460 इसवी के करीब साहित्य सर्जन भी होता था। अब साहित्य सर्जन क्या होता है? यानी की  दोहा,चौपाई ,गाथा, छंद ए सभी साहित्य सर्जन में होते थे।

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और उस समय के महान रचनाकार थे गोरखनाथ, विद्यावती, नरपति, कबीर आदि थे। करीबन 1500 ईस्वी के बाद जब भारत में हिंदी का विकास पूरे देश में हो रहा था, तभी हिंदी भाषा(Hindi Language) में बहुत बड़ा बदलाव आया। उस समय हमारे देश में मुगलो का शासन होना शुरू हुआ और मुगलों की भाषा का प्रयोग हिंदी भाषा(Hindi Language) में होने लगा,  लोग फारसी भाषा का प्रयोग करने लगे क्योंकि मुगल उसी को राजकाज में नौकरी देते थे जिसे फारसी भाषा का अच्छा ज्ञान होता था। जिसके कारण लोग हिंदी भाषा का उपयोग कम करने लगे जिसका परिणाम यह हुआ की फारसी की लगभग 3500 शब्द और अरबी के 2500 शब्द  पश्तो के 50 शब्द और तुर्की के 125 शब्द हिंदी में शामिल हो गए।

यह सब होने के बावजूद भी कुछ विद्वान कवियों ने लोगों के बीच हिंदी भाषा(Hindi Language) बोलने के लिए उन्होंने राम और कृष्ण की जन्मभूमि की ब्रिज भाषा को उठाया और उस भाषा में  काव्य की रचना की, जो  लोगों को  काफी पसंद आया। और धीरे-धीरे हिंदी और बृज भाषा को बोलने लगे। इस महान कार्यों को योगदान देने वाले महान कवि थे , संत तुलसीदास जी, संत  सूरदास जी ,मीराबाई जी, मलिक मोहम्मद जायसी जी, बिहारी जी तथा भूषण जी थे। जिनकी वजह से एक बार फिर भारत पर हिंदी भाषा(Hindi Language) का जन्म हुआ। फिर सन 1800 के करीब मुगलों भाषा का प्रभाव काफी कम होने लगा। हिंदी भाषा का प्रयोग सभी भारतीय करने लगे लेकिन कुछ सालों के बाद  फिर वही समय आया। जब अंग्रेज भारत आए। अंग्रेजों की अंग्रेजी भारत पर ऐसे चल रहा था मानो हिंदी का वजूद ही नहीं रहेगा, फिर से कुछ महान लेखकों ने एक पहल की। और उन्होंने खड़ी हिंदी का प्रयोग किया, जिसमें शुद्ध हिंदी का भी इस्तेमाल किया गया और कुछ ऐसी ऐसी पुस्तकें खड़ी भाषा में लिखी गई जो लोगों दिलों को भा जाती थी। लेकिन अंग्रेज भी बहुत  चलाक थे,उन्होंने कई चाल चली जो लोगों को अपनी ओर खींच लेते थे।

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इसी बीच महात्मा गांधी जी तथा अन्य देशभक्त इस विषय पर सोच ही रहे थे। उधर अंग्रेज भारत पर राज  करने के उद्देश्य से नहीं आया था। वह तो पूरी दुनिया में अंग्रेजी और अपने धर्म का परचार करने आया था। और उन्होंने यह देखा कि कई धर्म आपस में मिलकर इस देश की एकता को बनाए हैं। अंग्रेजो ने इस एकता को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाए। फिर जाति और धर्म पर फूट डालने की कोशिश की, और वे सफल हो गए। जिसके चलते उन्होंने लोगों के बीच अंग्रेजी तथा अपना धर्म का प्रचार किया। लोग अपनी एकता को छोड़कर अंग्रेजों की बातों में आ गए, जिसका परिणाम यह हुआ कि  हमारा हिंदुस्तान अंग्रेजों का गुलाम हो गया। लेकिन इस बीच हमारे गांधी जी ने फिर से हिंदुस्तान की एकता को जोड़ा और अंग्रेजों को देश से निकाल दिया। लेकिन हिंदू और मुस्लिम को एक नहीं बना पाए ,किसी कवि ने सही ही कहा है है कि

रहिमन धागा प्रेम का,  मत तोड़ो चटकाय

टूटे तो फिर ना जुड़े, जुड़े तो गांठ पड़ जाए

और यही हाल हुआ हिंदू और मुस्लिम में, दोनों ने अपने अपने मुल्क अलग कर लिए, एक हिंदुस्तान के दो भाग बट गए भारत और पाकिस्तान की जो 2 देशों में बट गए

जिसमें भारत का राष्ट्रभाषा हिंदी घोषित हो गया और पाकिस्तान का उर्दू घोषित हो गया। जिस चीज को बचाने के लिए कई लोगों ने अपनी जान दे दी फिर आखिर अंत में वही हुआ पूरी दुनिया के साथ भारत और पाकिस्तान अंग्रेजी का गुलाम हो गया। आज पूरे विश्व में अंग्रेजी बोलने बाली दूसरे देश इंडिया कहा जाता है। आज भारत 80% से ज्यादा लोग अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हैं।

हिंदी भाषा(Hindi Language) का प्रयोग मानो जैसा की एक गवार भाषा,यानी कि बेकार भाषा हो गया है क्योंकि हिंदी बोलने में शर्म महसूस करते हैं। लेकिन एक बार वह लोग जो हिंदी बोलने में शर्म महसूस करते है वह इतिहास के पन्ने को देखें। उन महान व्यक्तियों की बलिदान के बारे में सोचें जो हिंदी भाषा(Hindi Language) को बचाने में अपनी पूरी जिंदगी त्याग दी।

चाहे आज इंग्लिश कितना भी ज्यादा बोला जाए लेकिन आज भी गूगल का कहना यही है कि भारत में सबसे ज्यादा वेबसाइट और आर्टिकल हिंदी में सर्च होते हैं, और पढ़े जाते हैं। भारत में केवल 10% लोग हिंदी  में यूज करते हैं। आज भी लोग हिंदी में सबसे ज्यादा अखबार पढ़ते हैं और न्यूज़ देखते हैं। जानते हो ऐसा क्यों है क्योंकि हिंदुस्तान में 90% लोग हिंदी से प्यार करते हैं। और मुझे जानकर बहुत ही ज्यादा गर्व होता है। दोस्तों आप क्या सोचते हैं कमेंट में जरूर बताएं, और अगर आपको हमारा यह पोस्ट “History of Hindi Language” पसंद आया तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यबाद॥

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