एक बाप और बेटी के रिश्तों की कहानी Baap Beti Ki Inspirational Story in Hindi

एक बाप और बेटी के रिश्तों की कहानी Baap Beti Ki Inspirational Story in Hindi

Baap Beti Ki Inspirational Story in Hindi: आज पूनम लव मैरिज करके अपने पापा के पास आई और अपने पापा से कहने लगी पापा मैंने अपनी पसंद के लड़के से शादी कर ली है। उसके पापा बहुत गुस्से में थे पर वह बहुत सुलझे हुए शख्स थे, उनहोने बस अपनी बेटी से इतना ही कहा मेरे घर से निकल जाओ। बेटी ने कहा अभी मेरे पति के पास कोई काम नहीं है हमें रहने दीजिए। हम चले जाएंगे पर उसके पापा ने एक नहीं सुनी और उसे घर से बाहर कर दिया। Inspirational Story in Hindi

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कुछ साल बीत गए अब पूनम के पापा नहीं रहे और दुर्भाग्यवश जिस लड़के से पूनम ने शादी की थी वह भी उसे धोखा देकर भाग गया। पूनम की एक लड़की और एक लड़का था। पूनम खुद का एक रेस्टोरेंट चला रही थी जिससे उसका जीवन का यापन हो रहा था। पूनम को जब यह खबर हुई कि उसके पापा नहीं रहे तो उसने मन में सोचा अच्छा हुआ मुझे घर से निकाल दिया था। दर-दर की ठोकरे खाने के लिए छोड़ दिया था, मेरे पति के छोड़ जाने के बाद भी मुझे घर नहीं बुलाया। तो मैं नहीं जाऊंगी उनकी अंतिम यात्रा में पर उसके ताऊजी ने कहा कि पूनम हो आओ। जाने वाला शख्स तो चला गया अब उनसे दुश्मनी कैसी। पूनम ने पहले हां ना किया फिर सोचा चलो हो आती हूं देखूं तो जिन्होंने मुझे ठुकराया वह मरने के बाद कैसे सुकून पाते हैं। पूनम जब अपने पापा के घर आई तो सब उनकी अंतिम यात्रा की तैयारी कर रहे थे, पर पूनम को उनके मरने का कोई दुख नहीं था।

बस वह अपने ताऊ जी के कहने पर आई थी। अब पूनम के पापा की अंतिम यात्रा शुरू हुई सब रो रहे थे पर पूनम दूर खड़ी हुई थी, जैसे तैसे कार्यक्रम निपट गए। आज पूनम के पापा की 13वीं थी, उसके ताऊजी आए और पूनम के हाथों में एक खत देते हुए उन्होंने पूनम से कहा यह तुम्हारे पापा ने तुम्हें दिया है। हो सके तो इसे एक बार जरूर पढ़ लेना। रात हो चुकी थी और सारे मेहमान जा चुके थे। पूनम ने वह खत निकाला और पढ़ने लगी। Inspirational Story in Hindi

उस खत में सबसे पहले लिखा था मेरी प्यारी गुड़िया मुझे मालूम है कि तुम मुझसे नाराज हो। पर अपने पापा को माफ कर देना मैं जानता हूं तुम्हें मैंने घर से निकाल दिया था। तुम्हारे पास रहने की जगह नहीं थी तुम दर-दर की ठोकरे खा रही थी पर मैं भी उदास था, तुम्हें कैसे बताऊं। याद है तुम्हें जब तुम 5 साल की थी तब तुम्हारी मां हमें छोड़ कर चली गई थी तब तुम कितना रोती थी। मेरे बिना सोती नहीं थी रातों को उठ कर रोती थी तब मैं भी सारी रात तुम्हारे साथ जागता था। तुम जब स्कूल जाने से डरती थी तब मैं भी सारा वक्त तुम्हारे स्कूल की खिड़की पर खड़ा होता था और जैसे ही तुम स्कूल से बाहर आती थी तुम्हें सीने से लगा लेता था। वह कच्चा पक्का खाना याद है जो तुम्हें पसंद नहीं आता था मैं उसे फेंक कर फिर से तुम्हारे लिए खाना बनाता था ताकि तुम भूखी ना रहो। Inspirational Story in Hindi

याद है तुम्हें जब तुम्हें एक बार बुखार आया था तो मैं सारा दिन तुम्हारे पास बैठा रहता था रोता था, पर तुम्हें हंसाता था। ताकि तुम ना रो वरना मैं रो पड़ता था। ओ तुम्हारी पहली बार हाईस्कूल की परीक्षा तुम रात भर पढ़ती थी और मैं सारी रात तुम्हें चाय बना कर देता था,याद है तुम्हें। और तुम्हारी पहली जींस और छोटे कपड़े, वह गाड़ी, सारी कॉलोनी एक तरफ थी कि यह सब नहीं चलेगा, लड़की छोटे कपड़े नहीं पहनेगी। पर मैं तुम्हारे साथ खड़ा था किसी को तुम्हारी खुशी में बाधा बनने नहीं दिया। तुम्हारा वह रातों को देर से घर आना कभी-कभी शराब पीना, डिस्को जाना, लड़के के साथ घूमना, इन सब बातों को कभी मैंने गौर नहीं किया क्योंकि तुम जिस उम्र में थी उस उम्र में यह सब थोड़ा बहुत होता है। पर एक दिन तुम ऐसे लड़के से शादी कर घर आयी, वह भी उस लड़के से जिसके बारे में तुम्हें कुछ भी पता नहीं था। Inspirational Story in Hindi

तुम्हारा पापा हूं मैंने उस लड़के के बारे में सब पता किया उसने ना जाने वासना और पैसों के लिए कितनी लड़कियों को धोखा दिया था। पर तुम तो उस वक्त प्रेम में आंधी थी तुमने मुझसे नहीं पूछा और सीधी शादी करके आ गई। मेरे कितने अरमान थे की तुम्हें डोली में बैठाहूं, चांद सितारों की तरह तुम्हें सजाओ, ऐसी धूमधाम से शादी करूं कि लोग बोल पड़े कि वह देखो शर्मा जी जिन्होंने अपनी बच्ची को इतने नाजो से अकेले पाला है। पर तुमने मेरे सारे ख्वाब तोड़ दिए। खैर इन सब बातों का अब कोई मतलब नहीं है। मैंने तो तुम्हारे लिए खत इसलिए छोड़ा कि तुमसे कुछ बात कह सकूं।

मेरी गुड़िया अलमारी में तुम्हारी मां के गहने और मैंने जो तुम्हारी शादी के लिए गहने खरीदे थे वह सब रखे हैं, 3-4 घर और कुछ जमीनें हैं। मैंने सब तुम्हारे और तुम्हारे बच्चों के नाम कर दिया है। कुछ पैसे बैंक में है जो तुम बैंक जाकर उसे निकाल लेना। और आखरी में बस इतना ही कहूंगा मेरी गुड़िया, काश तुमने मुझे समझा होता।

मैं तुम्हारा दुश्मन नहीं था तुम्हारा पापा था। वह पापा जिसने तुम्हारी मां के मरने के बाद भी दूसरी शादी नहीं की। लोगों के ताने सुने, गालियां सुनी, ना जाने कितने रिश्ते ठुकराए, पर तुम्हें दूसरी मां से कष्ट ना हो इसलिए खुद की ख्वाहिशें मार दी। अंत में बस इतना ही कहूंगा मेरी गुड़िया, जिस दिन तुम शादी के जोड़े में घर आई थी ना, तुम्हारा बाप पहली बार टूटा था। तुम्हारी मां के मरने के वक्त भी उतना नहीं रोया जितना उस वक्त और उस दिन से हर दिन रोया। इसलिए नहीं कि समाज, जात, परिवार, रिश्तेदार क्या कहेंगे वल्कि इसलिए की जो मेरी नन्हीं सी गुड़िया सुशु तक करने के लिए सारी रात मुझे उठाती थी। पर जिसने शादी का इतना बड़ा फैसला लिया एक बार भी मुझे बताना सही नहीं समझा। गुड़िया अब तो तुम भी मां हो, औलाद का दर्द खुशी क्या होती है, वो जब दिल तोड़ते हैं तो कैसा लगता है, तुम अब महसूस कर सकती हो। लेकिन मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि तुम्हें कभी भी यह दर्द ना देखना पड़े।

एक खराब पिता ही समझ कर मुझे माफ कर देना मेरी गुड़िया। तुम्हारे पापा अच्छे नहीं थे जो तुमने उसे इतना बड़ा दर्द दिया। खत यहीं समाप्त करता हूं, हो सके तो मुझे माफ कर देना।

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और खत के साथ एक ड्राइंग लगी हुई थी जो खुद कभी पूनम ने बचपन में बनाई थी और उसमें लिखा था आई लव यू मेरे पापा। इतने में उसके ताऊजी आ गए। पूनम ने उन्हें रोते-रोते सब बताया पर एक बात उसके ताऊजी ने बताई। उसके ताऊजी ने कहा पूनम ओ जो तुम्हें रेस्टोरेंट खोलने और घर खरीदने के पैसे मैंने दिए थे। वह मैंने नहीं दिए थे ओ पैसे तुम्हारे पिताजी ने मुझसे दिलवाए थे। क्यों की औलाद चाहे कितनी भी बुरी क्यों ना हो, मां बाप कभी बुरे नहीं होते। औलाद चाहे मां बाप को छोड़ दे, मां बाप मरने के बाद भी बच्चों को दुआ देते हैं। Inspirational Story in Hindi

दोस्तों पूनम के पापा को सुकून मिलेगा या नहीं, मुझे नहीं पता। पर उस खत को पढ़ने के बाद शायद सारी जिंदगी पूनम को सुकून नहीं मिलेगा। आखिर में दोस्तों मैं बस इतना ही कहूंगा की लव मैरिज करना कोई गलत बात नहीं है। पर यदि इसमें आप अपने माताजी पिताजी को शामिल कर लें तो अच्छा रहेगा। क्योंकि पत्थर से पानी निकल जाता है वह तो मां बाप है ना। कब तक नहीं मानेंगे। दोस्तों हर बाप की एक इच्छा होती है अपनी बेटी को अपने हाथों से डोली में विदा करने की, हो सके तो उसे एक सपना मत रहने दीजिए। और सदैव अपने माता पिता का आदर कीजिए।

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