महाभारत की दिलचस्प प्रेम कहानियां Interesting Love Stories in Mahabharata

Interesting Love Stories in Mahabharata in Hindi

Interesting Love Stories in Mahabharata in Hindi: हमने महाभारत की कई कहानियां पढ़ी और सुनी है। इन कथाओं में हमें कई प्रेम कहानियां भी मिलती हैं जिनमें से कुछ प्रेम कहानियां तो बहुत प्रसिद्ध है जिनके बारे में सभी जानते हैं। परंतु दोस्तों महाभारत में कुछ ऐसी भी प्रेम कहानियां हैं जिनके बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते। तो आज हम आपको अपने इस पोस्ट “Interesting Love Stories in Mahabharata” में महाभारत की कुछ ऐसी प्रेम कहानियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं।

Interesting Love Stories in Mahabharata

रुक्मणी और श्री कृष्ण

हमने हमेशा से ही श्री कृष्ण और राधा की प्रेम कहानियां सुनी और पड़ी हैं। परंतु कहते हैं कि भगवान श्री कृष्ण ने रुक्मणी का अपहरण करके उन से शादी की थी। हालांकि रुक्मणी भी श्रीकृष्ण से बहुत प्रेम करती थी।और श्री कृष्णा और रुक्मणि ने अपनी मर्जी से ही शादी की थी।

गांधारी और धृतराष्ट्र

महाभारत में कौरवों की माता गांधारी को शादी से पहले अपने होने वाले पति अर्थात धृतराष्ट्र के बारे में पता नहीं था कि वह दृष्टिहीन हैं। परंतु जैसे ही गांधारी को अपने पति के दृष्टिहीन होने की बात पता चली, तो उन्होंने स्वयं भी अपने पति जैसी जिंदगी बिताने के लिए अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली। आँखें होते हुए भी गांधारी ने जिंदगी भर अपने आप को दृष्टिहीन रखा। Love Stories in Mahabharata

अर्जुन और उलूपी

हम सभी जानते हैं कि अर्जुन का विवाह द्रौपदी के साथ हुआ था। परंतु उलूपी नाग राजकुमारी थी अर्थात वह एक नाग कन्या थी। उलूपी का दिल अर्जुन पर आ गया और उलूपी ने अर्जुन का अपहरण कर उनसे शादी कर ली थी। परंतु जब उलूपी को यह पता चला कि अर्जुन पहले से ही शादीशुदा है तब उन्होंने अर्जुन को जाने दिया। साथ ही में उलूपी ने अर्जुन को एक वरदान दिया कि उन्हें पानी में कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

हिडिंबा और भीम

कुंती पुत्र भीम के प्रेम में हिडिंबा डूब चुकी थी और इस प्रेम ने हिडिंबा को बदल डाला। क्योंकि हिडिंबा पहले एक नरभक्षी थी। जैसे ही भीम और हिडिंबा की शादी हुई तो कुछ ही दिनों के बाद भीम ने उन्हें छोड़ दिया। हिडिंबा को भी अपने पति भीम से एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम घटोत्कच था। हिडिंबा ने अपने उस पुत्र को बिना कोई पश्चाताप के अकेले ही पाल-पोस कर बड़ा किया। और बाद में यही भीम का पुत्र घटोत्कच महाभारत की लड़ाई में उनके बहुत काम आया। Love Stories in Mahabharata

सत्यवती और ऋषि पाराशर

ऋषि पराशर सिद्ध योगि होने के साथ-साथ दिव्य शक्तियों के मालिक भी थे। उन्हें एक मछुआरे की पुत्री सत्यवती से प्रेम हो गया। सत्यवती लोगों को अपने नाव में यमुना पार करवाती थी। जब सत्यवती एक दिन ऋषि पराशर को अपने नाव में यमुना पार करवा रही थी तो ऋषि पराशर ने सत्यवती से कहा उन दोनों की रचना अनैतिक संबंध से एक संतान पैदा करने के लिए ही की गई है। तब सत्यवती ने ऋषि पाराशर के सामने तीन शर्ते रखी….

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पहली शर्त यह थी कि दोनों को शारीरिक संबंध बनाते हुए कोई ना देखें, इसके लिए ऋषि पाराशर ने अपनी शक्तियों से एक कृत्रिम आवरण बना दिया। सत्यवती की दूसरी शर्त यह थी उसके कुंवारेपन को कोई दाग ना लगे, ऋषि पाराशर ने तब सत्यवती को वरदान दिया कि जैसे ही बच्चे का जन्म होगा उनका शरीर दोबारा से पुनः कुंवारे जैसा हो जाएगा। तीसरी शर्त सत्यवती ने यह रखा की उससे जो मछली की दुर्गंध आती है वह सुगंधित हो जाए, ऋषि पाराशर ने चारों तरफ ऐसा सुगंधित वातावरण बना दिया कि 9 मील दूर से ही उसकी खुशबू आने लगती थी। 9 महीने बाद सत्यवती के गर्भ से वेदव्यास जी ने जन्म लिया।

अर्जुन और सुभद्रा

सुभद्रा के भाई गदा और अर्जुन दोनों ने द्रोणाचार्य के पास एक साथ ही शिक्षा ली थी। जब अर्जुन द्वारका में अपने मित्र श्री कृष्ण से मिलने गए तो सुभद्रा ने अर्जुन को अपने महल में बुला लिया, और उन दोनों में प्यार हो गया। फिर श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि वह सुभद्रा का अपहरण कर ले, और उससे विवाह कर ले। श्री कृष्ण की आज्ञा मानकर अर्जुन ने वैसा ही किया। जब सुभद्रा द्रौपदी के पास गयी तब उसने तुरंत द्रोपति को अपने विवाह के बारे में नहीं बताया, परंतु जब वह द्रोपति से घुल मिल गई तब उसने अपने और अर्जुन के विवाह के बारे में द्रौपदी को बता दिया। और द्रौपदी ने उसे स्वीकार भी कर लिया। Love Stories in Mahabharata

सत्यवती और शांतनु

ऋषि पाराशर के वरदान से सत्यवती के पास से मछली की नहीं बल्कि एक सुगंधित खुशबू आती थी, जो कि 9 मील दूर से ही पता लग जाती थी। राजा शांतनु को सत्यवती की खुशबू ने बेहद आकर्षित कर लिया। उन्होंने जब इस खुशबू का पीछा किया तब उन्होंने सत्यवती को नाव में पाया। उन्होंने सत्यवती से कहा कि वह उन्हें नदी पार करवा दे। जब राजा शांतनु नदी पार कर गए, तब उन्होंने सत्यवती से दोबारा विनती की वह नदी के दूसरे पार जाना चाहते हैं। इस तरह करते करते तीन-चार दिन बीत गए, बाद में राजा शांतनु और सत्यवती के बीच प्रेम हो गया, और दोनों ने विवाह कर लिया।

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उम्मीद करते हैं दोस्तों महाभारत से जुड़ी यह सभी प्रेम कहानियां Love Stories in Mahabharata आपको रोचक लगी होंगी। आप अपने अनमोल विचार हमें कमेंट जरूर कीजिएगा। और अगर आपको हमारा यह पोस्ट “Interesting Love Stories in Mahabharata” पसंद आया तो आप इसे शेयर कीजिए। धन्यवाद॥

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