विशाल महाकाव्य महाभारत Mahabharat Mahakavya in Hindi

Mahabharat Mahakavya in Hindi

Mahabharat Mahakavya in Hindi:-

दोस्तों महाभारत को पहले भारत संहिता कहा जाता था। महाभारत ज्ञान तथा जीवन दर्शन का ग्रंथ होने के कारण इसे पंचम वेद भी कहा जाता है। पुराने समय में ही इस ग्रंथ का नाम महाभारत पड़ा था। दोस्तों विश्व साहित्य में महाभारत ग्रंथ सबसे विशाल महाकाव्य है। जिसके रचयिता महर्षि वेद व्यास जी थे। रामायण ग्रंथ की तरह ही इस महाभारत महाकाव्य को विश्व के सभी भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। तथा भारत के ही नहीं अन्य देशों के लेखक भी इस ग्रंथ से प्रेरित हुए हैं। महाभारत का रूपांतरण काव्य के साथ-साथ कथा नाटक और कथा चित्र वालियों में भी हो चुका है। इस महाकाव्य के कथाओं को भारत की समस्त नृत्य शैलियों तथा संगीत नाटिकाओं में भी दर्शाया जाता है। महाभारत के कथाओं पर कितने हैं TV सीरियल और सिनेमा बन चुके हैं। और आज भी इस महाकाव्य का कथानक इतना सशक्त है की आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके  हॉलीवुड में बेनहूर, हैरी पॉटर अवतार और लॉर्ड ऑफ द रिंग्स से भी अधिक भव्य मूवी का सफलतापूर्वक निर्माण किया जा सकता है। Mahabharat Mahakavya in Hindi

भारतीय जीवन का चित्रण

महाभारत (Mahabharat Mahakavya in Hindi) का यह विशाल महाकाव्य में भारतीय जीवन के सभी अंगों का विस्तारित चित्रण किया गया है। महाभारत के रचनाकार ने अपनी लेखनी पर स्वैच्छिक नियंत्रण रखा था। अभी भी जब इस महाकाव्य का चित्रण किया जाता है। तब आज के लेखक भी इस कथा को लिखने में अपने आप पर नियंत्रण रखते हैं। कौरवों और पांडवों के जन्म से जुड़े कथा को लिखने में कोई भी अश्लीलता का प्रयोग नहीं करते। चाहे तो पाठक उसे यथार्थ से जोड़कर देखें या ग्रंथ कार्य की कल्पना को सराहें। किंतु जो कुछ और जैसे भी लिखा गया है वह वैज्ञानिक दृष्टि से भी संभव है।

युगों की ऐतिहासिक कडी

दोस्तों रामायण महाकाव्य की गाथा त्रेता युग की घटना है।और हिन्दू पुराणों के अनुसार महाभारत महाकाव्य की गाथा द्वापर युग से आरंभ होकर कलयुग के आगमन तक का समस्त इतिहास अपने में समेटे है। इस में वर्णित है कुछ पात्र तो ऐसे हैं जो रामायण और महाभारत दोनों युगों में ही मौजूद थे। जैसे कि देवर्षि नारद, भगवान परशुराम, हनुमान जी इत्यादि यह सब वह पात्र हैं जोकि सतयुग त्रेता द्वापर और कलयुग को जोड़ने की कड़ी बने। अर्थात यह सभी पात्र रामायण के साथ-साथ महाभारत काल में भी मौजूद थे। यह सभी पात्र सनातन धर्म की निरंतर श्रृंखला को आदिकाल से आधुनिक युग तक जोड़ते हैं।

महाभारत के भयानक महायुद्ध में कौरवों तथा पांडवों के साथ-साथ 18 अक्षौहिणी सेनाओं ने भी भाग लिया था। दोस्तों महाभारत महाकाव्य के अनुसार एक अक्षौहिणी सेना मैं लगभग 21870 रथ, 21870 हाथी, 109350 पैदल एयर, 65610 घुड़सवार होते है। इस अध्भुत महाकाव्य में वर्णित उल्लेख के अनुसार युद्ध में सैनिक बहुत ही भव्य तरीके से युद्ध किया करते थे।

महाभारत महाकाव्य(Mahabharat Mahakavya in Hindi) मुख्यता कौरव,पांडव तथा उनके वंशज और उस समय के तत्कालीन भारत के अन्य वंशो के परस्पर संबंधों,संघर्षों,रीति-रिवाजों की महान गाथा अपने में समेटे हुए हैं। जो अंत में निर्णायक महाभारत युद्ध की ओर बढ़ती है।

दोस्तों महाभारत का भयानक युद्ध 18 दिनों तक चला था। उसमें दोनों पक्षों कि 18 अक्षौहिणी सेना के साथ-साथ भारत के लगभग सभी अधर्म पर चलने वाले क्षत्रिय वीरों का अंत हुआ था। महाभारत महाकाव्य में सभी पात्र के निजी गाथा के साथ सजीव संबंध को जोड़ते हैं। तथा मानव जीवन के उच्चतम एम निम्नतम व्यावहारिक स्तरों को दर्शाते हैं।

 दोस्तो लगभग 100000 श्लोकों वाले इस महाकाव्य में 76000 श्र्लोकों में तो पात्रों के आख्यानों का ही उल्लेख है। जो इस(Mahabharat Mahakavya in Hindi) महाकाव्य के महायुद्ध को क्लाइमेक्स (अंत) की ओर ले जाते हैं।

महाभारत काल में दर्शाई गई भारतीय सभ्यता एक बहुत ही विकसित सभ्यता हैं। तथा इस महाकाव्य में दर्शाए गए हर एक पात्र महामानव का अवतार लगते हैं। महाभारत के समय का हर एक पात्र केवल भारत में ही नहीं अपितु वह स्वर्ग लोक और पाताल लोक में भी विचरण किया करते थे। एक और बात जो महाभारत को रामायण से अलग करती है। वह यह है की उल्लेखित महाभारत महाकाव्य के तथ्यों के अनुसार उजागर होता है कि रामायण काल की अपेक्षा में महाभारत काल में राक्षस पात्र बहुत कम थे। जिससे समाजिक विकास का आभाष हम सबको मिलता है।

नैतिक महत्व

रामायण महाकाव्य मैं भगवान श्रीराम प्रभु का चरित्र ही आदर्श कर्तव्यपरायणता के प्रत्येक स्थिति को दर्शाया गया है। परंतु महाभारत में सामाजिक जीवन की घटनाओं तथा परिस्थितियों में समस्याओं से जूझने का चित्रण किया गया है। लगभग 20000 से अधिक श्लोक तो महाभारत में धर्म एवं नीति के बारे में लिखा गया है।

श्रीमद्भागवत गीता (Srimad Bhagavad-Gita)

श्रीमद्भागवत गीता महाभारत जैसे विशाल महाकाव्य का एक विशिष्ट भाग है। महाभारत महाकाव्य में लिखी गई श्रीमद्भागवत गीता संसार की सबसे लंबी दार्शनिक कविता है। गीता का अति बहुमूल्य ज्ञान महाभारत युद्ध आरंभ होने से पहले भगवान श्री कृष्ण और कुंती पुत्र अर्जुन के बीच वार्तालाप की सैली में लिखी गई है। भागवत गीता का महान संदेश प्रेरणादायक तर्कसंगत तथा प्रत्येक स्थिति में श्रेष्ठ है।

संक्षिप्त में गीता सार इस प्रकार है(Bhagavad Gita Summary in Hindi)

  • जब भी संसार में पृथ्वी लोक पर धर्म की हानि होती है तब ईश्वर (परमात्मा) धर्म की पुनः स्थापना करने के लिए किसी न किसी रूप में पृथ्वी पर अवतरित होते हैं।
  • ईश्वर परमात्मा सभी प्रकार के ज्ञान के स्रोत हैं। वह सर्वशक्तिमान,सर्वज्ञ तथा सर्व व्यापक हैं।
  • मृत्यु केवल शरीर की होती है आत्मा अजर और अमर है। आत्मा परमात्मा का ही एक छोटा सा स्वरुप है। वह पहले शरीर के अंत के पश्चात दूसरे शरीर में पुनः प्रवेश कर नए शरीर के अनुकूल अपनी क्रियाएं करती है।
  • जन्म मरण का या घटनाक्रम आत्मा की मुक्ति तक (जब तक कि मोक्ष ना मिल जाए तक) निरंतर चलता रहता है।
  • सत्य और धर्म सदैव और हमेशा अधर्म पर विजय होते हैं।
  • सभी इंसान एक ही ईश्वर परमात्मा की अपनी अपनी आस्था अनुसार आराधना और पूजा करते हैं। किंतु ईश्वर (परमात्मा) के जिस रुप में आराधक (हम सब) आस्था व्यक्त करते हैं। ईश्वर (परमात्मा) उसी रूप को सार्थक कर हम सब की आराधना को स्वीकार करते हैं। ऐसी बातें में हिंदू धर्म की धर्म निरपेक्षता समाई हुई है।
  • हर प्राणी को बिना किसी लोभ (पुरस्कार) या तिरस्कार के भय को छोड़कर अपने कर्तव्यों का पालन करना          चाहिए। तथा अपने मन के भावों को कर्तव्य पालन करते समय विरक्त रखना चाहिए।
  • प्राणी का अधिकार केवल कर्म करने पर है। कर्म के फल पर नहीं,कर्मफल ईश्वर (परमात्मा) के अधीन है।
  •  दुनिया में अहिंसा ही परम धर्म है। उसी प्रकार धर्म की रक्षा हेतु हिंसा भी उचित है।
  • किसी भी कार्य या किसी चीज की ज्यादा इच्छा अच्छी नहीं अर्थात अति सर्वत्र वर्जित है।
  • हर प्राणी को अपने मन के अनुकूल धर्म अनुसार कर्म करना चाहिए। तथा अपने हर कर्म को ईश्वर (परमात्मा) के प्रति समर्पित कर देना चाहिए।

गीता की दार्शनिकता विश्व में सबसे प्राचीन है। गीता का दिव्य ज्ञान सभी जातियों,देशों के प्रत्येक स्थिति में मान्य है। दुनिया का किसी भी वर्ग,जाति,धर्म के व्यक्ति भागवत गीता का ज्ञान को प्राप्त कर सकते हैं। भागवत गीता में मानव जीवन में उत्पन्न होने वाली सारी समस्याओं का हल है। इसलिए हर इंसान को भागवत गीता अपने जीवन में जरूर पढ़ना चाहिए।

ऐतिहासिक महत्व

दोस्तों मानव सृष्टि के इतिहास में भारत का इतिहास सबसे प्राचीन माना जाता है। भारत के सूर्यवंशी और चंद्रवंश का इतिहास जितना पुराना है। इतना पुराना इतिहास विश्व के अन्य किसी वंशों का मौजूद नहीं है। यदि रामायण महाकाव्य में सूर्यवंशी राजाओं का इतिहास है। तो महाभारत के विशाल महाकाव्य में चंद्रवंशी राजाओं का इतिहास वर्णित किया गया है। सीरिया और मिस्र में जिन राजवंशो का वृतांत हमें मिलता है वह भी चंद्रवंश की ही शाखाएं हैं।

दोस्तों पुराने समय में इतिहास आख्यान संहिता तथा पुरान को एक ही अर्थ में प्रयोग किया जाता था। महाभारत, Mahabharat Mahakavya in Hindi रामायण तथा पुराण, हमारे प्राचीन इतिहास के बहुमूल्य स्रोत हैं। जिनको केवल साहित्य समझ कर अछूता छोड़ा गया है। महाभारत काल के पश्चात से मौर्य वंश तक का इतिहास नष्ट अथवा लुप्त हो गया है। दोस्तों इतिहास की इस विक्षिप्त श्रृंखलाओं को पुनः जोड़ने के लिए हम सभी को पुराण तथा महाकाव्यों पर शोध करना पड़ेगा।

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