सच्ची प्रार्थना (आध्यत्मिक कहानी) Motivational Short Story in Hindi

प्रेम और प्रार्थना इनमें शब्दों का तब तक कोई महत्व नहीं है जब तक यह दिल से ना निकले। दिल से की गई प्रार्थना के महत्व को बताती है यह कहानी….

Motivational Short Story in Hindi

एक झील के किनारे तीन फकीर थे तीनों अनपढ़ थे। लेकिन उनके ख्याति दूर-दूर तक हो गई थी कि वह बहुत ही पवित्र पुरुष है। दूर-दूर से लोग उनके दर्शन करने आने लगे थे। यह खबर बड़े पुरोहित के पास भी पहुंची की तीन पवित्र पुरुष झील के उस पार है। इस पर उन्होंने कहा कि वह पवित्र कैसे हो सकते हैं? उन्होंने तो दीक्षा भी नहीं ली। ओ सोच में पड़ गया कि हजारों लोग उनके दर्शन को जा रहे हैं और कृतार्थ भी हो रहे हैं तो चल कर देखें तो सही… आखिर मामला क्या है?

शब्दों का असर

यह सोचकर वह नाव में सवार हुआ और झील के उस पार पहुंच गया। कितने बे पढ़े और गवार लोग है यह। अपने हि जड़ो के ऊपर बैठे हैं। उन्हें देखकर मन ही मन पुरोहित उनका उपहास करने लगा, जब पुरोहित उनके सामने गया तो उन तीनों ने झुक कर उन्हें प्रणाम किया ।पुरोहित के अहम को इससे बहुत संतुष्टि मिली। इन लोगों से डरने की भला क्या बात है, पुरोहित ने मन ही मन सोचा।

पुरोहित ने उसी अहंकार पूर्ण वाणी में तीनों से प्रश्न किया… तुम क्या करते हो? क्या है तुम्हारी प्रार्थना? तुम्हारी पद्धति क्या है? इस पर उन तीनों ने एक दूसरे का मुंह ताकने लगे। पद्धति इस विषय में तो हम कुछ भी नहीं जानते, उन्होंने बड़ी मासूमियत से कहा। हम बे पढ़े लिखे लोग हैं किसी ने हमें कुछ नहीं सिखाया। इतने बड़े पुरोहित के सामने कुछ भी कहने में उन्हें संकोच हो रहा था, फिर भी उन्होंने कहा हम तीनों ने मिलकर अपनी एक खुद की प्रार्थना गढ़ी है।

इस पर पुरोहित ने फिर अकड़ कर कहा बताओ क्या है तुम्हारी प्रार्थना? तीनों ने कहा हमने सुन रखा है कि परमात्मा तीन है… त्रिमूर्ति। और हम भी तीन हैं। और यही सोचकर हमने एक प्रार्थना बना ली की…. तुम भी तीन हो हम भी तीन हैं हम पर कृपा करो। तुम भी तीन हो हम भी तीन हैं हम पर कृपा करो, और वह यह दोहराते चले गए।

इस पर नाराज होकर पुरोहित ने कहा बंद करो इसे। यह भी कोई प्रार्थना है प्रार्थना प्रमाणिक होनी चाहिए। वह सुकृति प्राप्त होने चाहिए, मैं तुम्हें एक प्रमाणिक प्रार्थना बताता हूं इसे याद करो और आज से यही प्रार्थना करो। महा पुरोहित ने एक लंबी प्रार्थना उन्हें बताइ प्रार्थना बहुत लंबी थी और बहुत कठिन भी। उन तीनों ने कहा हम बहुत गवार लोग हैं हमारे लिए इस प्रार्थना को थोड़ा संक्षिप्त कर दो। इस पर पुरोहित ने कहा ना तो यह सरल हो सकती है नाही संक्षिप्त, यह प्रमाणिक प्रार्थना है। जो इस प्रार्थना को नहीं करेगा उसके लिए स्वर्ग का द्वार बंद है।

आप हमारे लिए कृपया करके इस प्रार्थना को दोहरा दीजिए। तीनों ने आग्रह किया पुरोहित ने प्रार्थना दोहरा दी और प्रसन्न होकर नाव में बैठकर चला गया। आज उसके अहंकार को पूर्ण संतुष्टि मिली थी। ओ आधे  झील पर पहुंचा ही था कि उसने देखा कि उसके पीछे एक बवंडर चला आ रहा है। घोर आश्चर्य उसने ध्यान से देखा वो तीनो फकीर पानी पर दौड़ते चले आ रहे हैं। पुरोहित को तो मानो प्राण ही नहीं निकल गए। पास आने पर तीनों ने ही पानी के ऊपर हि पुरोहित को दंडवत प्रणाम किया,…. और बोले हम प्रार्थना भूल गए हैं। कृपा करके उसे एक बार फिर दोहरा दीजिए। हम बे पढ़े लिखे लोग हैं हम पर कृपा करें। अब पुरोहित का अहंकार चूर-चूर हो गया था।

उसने लज्जित होकर कहा तुम्हारी प्रार्थना काम की रही है तुम यही दोहराव। तुम भी तीन हो हम भी तीन हैं हम पर कृपा करो, तुम भी तीन हो हम भी तीन हैं हम पर कृपा करो।

इस कहानी का बस यही सार है की प्रेम और प्रार्थना दोनों का संबंध हृदय से है ना ही इसकी कोई प्रमाणिक व्यवस्था है ना ही विधि ना ही कोई तंत्र नहीं कोई मंत्र। इन्हें सिखाया नहीं जा सकता विज्ञान सिखाया जा सकता है परंतु प्रेम और प्रार्थना नहीं। सारा शब्दकोश वर्णमाला के अक्षरों का जोड़ ही तो है, यदि दिल से वर्ण माला भी दोहरा दी जाए तो ईश्वर अपने लिए प्रार्थना खुद ही कर लेंगे।

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पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय
ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित हो

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