मुंडेश्वरी मंदिर का हैरान कर देने वाला रहस्य Mundeshwari Temple Mystery in Hindi

Mundeshwari Temple Mystery in Hind

Mundeshwari Temple Mystery in Hindi: बिहार शुरुआत से ही समृद्धि और संस्कृति वाला राज्य रहा है। अगर आप बिहार के इतिहास को देखेंगे तो आप जानेंगे कि रामायण काल से लेकर महाभारत काल तक बिहार का जिक्र आया है। जहां तक की कई धर्म और कई पुण्य आत्माओं का जन्म भी इसी राज्य में हुआ है। दोस्तों आज हम आपको पोस्ट में बिहार राज्य के एक ऐसे ही अद्भुत और चमत्कारिक मंदिर के बारे में बताएंगे। जिसके बारे में आप जानकर दांतों तले उंगली दबा लेंगे, और यह सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि भला ऐसा भी कहीं हो सकता है। तो चलिए जानते हैं कि यह मंदिर कहां स्थित है? और इस मंदिर का क्या नाम है? और इस मंदिर में ऐसा क्या होता है? जो यह मंदिर पूरी दुनिया में इतनी ज्यादा मशहूर है।

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मुंडेश्वरी मंदिर का इतिहास Mundeshwari Temple History

मुंडेश्वरी मंदिर जोकि बिहार राज्य के मुख्य धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर अंचल में भंवरा पहाड़ी पर 608 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह प्राचीन मंदिर पुरातात्विक धरोहर ही नहीं बल्कि पर्यटन का जीवंत केंद्र भी है। दोस्तों यह मंदिर को कब और किसने बनाया है यह दावे के साथ कहना बहुत ही मुश्किल है, लेकिन यहां से प्राप्त शिलालेख के अनुसार माना जाता है की उदय सेन नामक छत्रपति शासनकाल में इसका निर्माण हुआ था। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह मंदिर भारत के सर्वाधिक प्राचीन और सुंदर मंदिरों में से एक है। भारत के पुरातत्व संरक्षण विभाग द्वारा संरक्षित मुंडेश्वरी मंदिर नव निर्माण के लिए योजना बनाई जा रही है। और इसके साथ ही इस अद्भुत मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल करवाने का भी प्रयास किया जा रहा है। चलिए अब आपको बतलाते हैं इस मंदिर में होने वाले चमत्कार के बारे में…

मुंडेश्वरी मंदिर का चमत्कार Mundeshwari Temple Mystery

मुंडेश्वरी मंदिर की सबसे बड़ी और विलक्षण विशेषता तो यह है की यहां पशु बलि की सात्विक परंपरा है। मुंडेश्वरी मंदिर में बली के रूप में बकरा चढ़ाया जाता है लेकिन उसका जीवन नहीं लिया जाता है। दोस्तों अब आप सोच रहे होंगे कि बकरे की बलि भी चढ़ाई जाती है, और उसका जीवन भी नहीं लिया जाता है ऐसा कैसे संभव है? पर दोस्तों यह बात सच है, यहां इस मंदिर में ऐसा ही होता है यहां भक्तों के कामनाओं के पूरा होने के बाद बकरे की सात्विक बलि चढ़ाई जाती है। लेकिन माता रक्त की बलि नहीं लेती बल्कि बलि के समय भक्तों में माता के प्रति आश्चर्यजनक आस्था पनपती है। ऐसा इसलिए होता है कि जब बलि के लिए बकरे को माता की मूर्ति के सामने लाया जाता है तो इस मंदिर के पुजारी चावल को मुट्ठी में लेकर माता की मूर्ति से स्पर्श करा कर बकरे पर फेंक देते हैं। चावल गिरते ही बकरा उसी समय अचेत मृत के समान बेहोश हो जाता है। थोड़ी देर के बाद चावल फेंकने की प्रक्रिया फिर से होती है, तो इसके बाद बकरा उठ खड़ा होता है। और इसके बाद उस बकरे को मुक्त कर दिया जाता है।

यह चमत्कार जब लोगों के सामने होता है तो यह चमत्कार देखकर लोग अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पाते। उन्हें ऐसा लगता है कि आखिर यह कैसे संभव है? लेकिन वहीं दूसरी ओर माता में विश्वास रखने वाले श्रद्धालु-गन इसे माता का चमत्कार ही मानते हैं।

पौराणिक मान्यता Mundeshwari Temple Pauranik Katha

इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब चंड मुंड के नाश के लिए देवी मां प्रकट हुई थी, तो ‘चंड’ के विनाश के बाद, ‘मुंड’ युद्ध करते हुए इसी पहाड़ी में छिप गया था। और यही पर माता ने उसका वध किया था।

यहां भगवान शिव का एक पंचमुखी शिवलिंग है जो अत्यंत दुर्लभ है। और जिसके बारे में कहा जाता है कि इस चमत्कारिक शिवलिंग का रंग सुबह, दोपहर, शाम को अलग अलग दिखाई पड़ता है। मंदिर का अष्टकार गर्भगृह भी है जो इस मंदिर के निर्माण से अब तक कायम है। जानकार यह मानते हैं कि उत्तर नगर के कुशीनगर और नेपाल के कपिलवस्तु का मार्ग मुंडेश्वरी मंदिर से ही जुड़ा था। पुरातत्वविदों का मानना है कि इस इलाके में कभी भी भूकंप का भयंकर झटका लगा होगा, जिसके कारन पहाड़ी के मलबे के अंदर गणेश, भगवान शिव और अनेकों देवी देवताओं की मूर्तियां दब गई, और खुदाई के दौरान यह मिलती रही। और दोस्तों यहां खुदाई के दौरान मंदिरों के समूह भी मिले हैं।

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बिहार राज्य धार्मिक न्याय परिषद के अध्यक्ष आचार्य ‘किशोर कुणाल’ का मानना है कि मुंडेश्वरी मंदिर को किसी आक्रमणकारियों ने नहीं तोड़ा है बल्कि प्राकृतिक आपदा, बरसात, तूफान आंधी-पानी से इसका नुकसान हुआ है।

पहाड़ी के शिखर पर स्थित मुंडेश्वरी मंदिर तक पहुंचने के लिए 1978 से लेकर 1979 तक सीढ़ियों का निर्माण किया गया। वर्तमान में मुंडेश्वरी मंदिर का तेजी से विकास हो रहा है। मुंडेश्वरी मंदिर को 2007 में बिहार राज्य धार्मिक न्याय परिषद ने अधिग्रहित कर लिया था। इसके प्रयास से ढाई एकड़ जमीन पर्यटन विभाग को सौंपी गई। धर्मशाला और यज्ञशाला का निर्माण किया गया, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वैष्णो देवी और राजगीर के तर्ज पर रोपवे बनाने का काम किया गया।

मोहनिया और बेतरनिया गांव के पास भव्य मुंडेश्वरी प्रवेश द्वार बनाया गया है। यहां पर अतिथि गृह भी बना है। मुंडेश्वरी मंदिर में श्रद्धालुओं का साल भर आना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र के मौके पर यहां श्रद्धालु की भारी भीड़ जमती है।

दोस्तों अगर आपने मुंडेश्वरी धाम (मुंडेश्वरी मंदिर) के दर्शन किए हैं, और यहां घटने वाली अद्भुत घटना को देखा है तो अपने दुर्लभ अनुभव हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिएगा।

तो उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह पोस्ट “Mundeshwari Temple Mystery in Hindi” पसंद आया होगा, अगर आपको हमारा पोस्ट पसंद आता है तो आप इसे शेयर कीजिए। धन्यवाद॥

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