Parker Solar Probe in Hindi

नासा चला सूरज को छूने Parker Solar Probe in Hindi

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Parker Solar Probe in Hindi: इकेरस ने सूरज के करीब जाने का साहस किया था लेकिन ऐसा करने पर उसके मुंह से बने पर यानी पंख जल गए, और वह पानी में गिर कर डूब गया। ग्रीक माइथोलॉजी का यह गाथा हमें सतर्क करती है कि सूरज के करीब जाना कितना खतरनाक हो सकता है। सच ही तो है 5504 डिग्री सेल्सियस के तापमान से जलने वाली चीज के आसपास खेला भी नहीं जा सकता। अभी तक Helios 2 (spacecraft) नाम का अंतरिक्ष यान ‘सोलर इन्फर्नो’ Solar Inferno सूर्य के सबसे करीब गया है। वह भी सूरज की सतह से 43 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर रहा। सूरज हमारे पहुंच से काफी दूर लगता है लेकिन नासा ने इस नामुमकिन काम को पूरा करने को ठाना है, उसने सूरज को छूने की तैयारी कर ली है।

Parker Solar Probe in Hindi

नासा के सबसे महत्वकांक्षी मिशन का नाम “द पारकर सोलर प्रोब” Parker Solar Probe (NASA) है। इसका मकसद इतिहास बनाने का है। इंसान के द्वारा बनाया गया कोई भी ऑब्जेक्ट इस ‘हॉट वाल्व ऑफ फायर’ यानी कि सूर्य के इतना करीब कभी नहीं गया, जितना कि अब अविश्वसनीय ‘पार्कर सोलर प्रोब’ जाना चाहता है। नासा ने इसे  “A Mission 60 Years in The Making” के नाम से लेवल क्या है। यह 11 अगस्त 2018 को पृथ्वी से सोलर कोरोना(Solar corona) की यात्रा शुरू करेगा। जिस का तापमान लगभग 1 करोड़ 50 लाख सेल्सियस है। हलाकि नासा का यह प्रोजेक्ट क्रेजी लगता है, पर बात दिलचस्प है की यह अंतरिक्ष यान सूरज के आग उगलने वाले वातावरण में भी आरामदायक 30 डिग्री सेल्सियस का आनंद उठाएगा। तो आखिर कैसे ‘पार्कर सोलर प्रोब’ सूर्य की अत्यंत ज्वलनशील गर्मी का सामना कर पाएगा?

नासा ने सूर्य के इतने अधिक तापमान को झेलने का solar shield के रूप में निकाला है, जिसे थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम या TPS के नाम से जाना जाता है। तपस(Thermal Protection System) का डायमीटर 2.4 मीटर है। यह 4.5 इंच मोटा है। 73 किलोग्राम का हल्का यह ‘प्रोब कार्बन’ कंपोजिट प्रोत से बना है, जो दो कार्बन प्लूटो के बीच मौजूद है। सूरज की ओर मुंह करने वाली प्लेट को मिट्टी के बर्तन ठंडे पेंट से पोता गया है जो ज्यादा से ज्यादा हिट को रिफ्लेक्ट कर देता है। अंतरिक्ष यान के उपकरण इससे ठंडे बने रहेंगे और इस तरह शील्ड में कोई भी नुकसान नहीं होगा। लेकिन कुछ उपकरण हिट शील्ड सुरक्षा से बाहर हैं। ‘फ्राइडे कब’ के नाम से जाना जाने वाला एक सेंसर इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वह शील्ड के बाहर रहकर कई चीजों का वैज्ञानिक माप लेगा। यह आयन और इलेक्ट्रॉन फ्लो और सोलर विंड के बहने की जानकारी देगा। वैज्ञानिकों द्वारा प्रोब को तैयार करने के लिए यूनिक टेक्निक का इस्तेमाल किया गया है। इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि यह उपकरण न ही केवल जीवित रहे, बल्कि सोलर corena से सटीक रीडिंग भी भेज सके। यह टाइटेनियम, जीकेनियम, मेलडीनियम कि सीड से बना है। जो मेलडीनियम के मिश्र धातु यानी alloy है, जिसका मेल्टिंग पॉइंट लगभग 2349 सेल्सियस है।

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‘सोलर प्रोब कब’ भी टंगस्टन से बने चिप्स का उपयोग करेगा, जोकि उसके लिए एक इलेक्ट्रिक फील्ड बनाएगा। इसका मेल्टिंग पॉइंट लगभग 3422 डिग्री सेल्सियस है। इसके अलावा कई और भी सेंसर हैं जो हिट sild से बाहर हैं और अंतरिक्ष यान के किनारे पर जुड़े हैं। यह सेल फोन के आकार से आधे हैं यह सेंसर सूरज की रोशनी का पता लगाएंगे और समस्या होने पर सेंट्रल कंप्यूटर को सतर्क करेंगे। जिनके सॉफ्टवेयर को यह सुनिश्चित करने के लिए प्रोग्राम किया गया है की अंतरिक्ष यान बिना इंसानी दखल अंदाजी के खुद से अपने आप को सही पोजीशन पर रख सके। ताकि किसी भी उपकरण सेंसर को कुछ भी नुकसान ना पहुंचे। Parker Solar Probe in Hindi

लेकिन कोरोना के भीषण तापमान की तुलना में यह सारे उपाय छोटे हैं। इसके बावजूद ‘पार्कर सोलर प्रोब'(Parker Solar Probe) काम करेगा। इसके पीछे के विज्ञान को समझने के लिए हमें तापमान और हिट के बीच के अंतर को समझने की आवश्यकता है। जबकि तापमान एक माप है की अंतरिक्ष कन यानी स्पेस पार्टिकल कितनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, हिट ट्रांसफर होने वाली ऊर्जा की मात्रा है। अंतरिक्ष जैसे खाली जगह में ज्यादा तापमान का मतलब हमेशा ज्यादा हिट नहीं होता। क्योंकि अंतरिक्ष में कणों की मात्रा उतनी अधिक नहीं होती है, ज्यादा तेजी से यात्रा करने पर भी कम मात्रा में होने की वजह से वह कन अपनी मात्रा में हीट अंतरिक्ष यान की ओर नहीं भेज पाएंगे।

Parker Space Probe 1 करोड़ 50 लाख तापमान वाले कोरोना में दाखिल जरूर होगा लेकिन हिट शील्ड की सतह केवल 1372 डिग्री सेल्सियस तापमान तक पहुंचेगी। करीब 3.7 लीटर डी-आर्गनाइज्ड ionised पानी का उपयोग प्रोब के सिस्टम में कूलिंग के रूप में किया जाता है।

अंतरिक्ष यान को 10 डिग्री सेल्सियस से 125 डिग्री सेल्सियस तक के बदलते रेंज में बदलते टेंपरेचर का सामना करना पड़ेगा। पानी को ज्यादा तापमान में उबालने से बचाने के लिए उस का बॉयलिंग पॉइंट 125 डिग्री से अधिक रखा जाएगा। यह पानी ज्यादा ठंड को भी झेल पाएगा बिना जम्मे, कम तापमान होने पर भी वह अपनी यात्रा आसानी से पूरी कर पाएगा।

यह Fly Bay का मिशन 7 साल का होगा जिसमें वह लगभग 24 बार सूर्य के चक्कर लगाएगा। हमें मानव जाति द्वारा बनाए गए एक और इतिहास को देखने के लिए कम से कम 2024 तक इंतजार करना होगा। दोस्तों आपको क्या लगता है की “पार्कर सोलर प्रोब” सूरज की तेज गर्मी से बच पाएगा? कमेंट बॉक्स में हमें अपने विचार जरूर बताएं।

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