वीरों का सफर Patriotic Poems in Hindi

patriotic poems in hindi

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वीरों का सफर

वीर तुम बढ़ते जाना

रुकना तेरा काम नहीं

थम जाना तेरा धर्म नहीं

चाहे राहों में बिछे हो अंगारे

या ऊंचे पर्वतों का डेरा हो

चाहे मरुभूमि का विराना हो

या बर्फो का बसेरा हो

मातृभूमि की रक्षा को

चीर कर विपदाओं का सीना

बढ़ते जाना  रुकना नहीं

चाहे राहों में कट जाए शीश

या हो जाए खून की होली

एक एक दुश्मनों पर तुम

भारी पड़ जाओ ऐसे

एक हो जाओ दस के जैसे

डर कर भाग पड़े गद्दार

देख तेरा हौसला बुलंद अपार

तन में सांस आखरी हो फिर  भी

शीश वही नतमस्तक हो तेरा

जहां ऊंचाइयो में लहराए तिरंगा प्यारा

यह सफर जो रूक भी जाए तेरा,

दूजा फर शुरू हो जाएगा

जब तिरंगो में लिपटी तेरी

जीवन यात्रा नए सफर पर जाएगा

कभी न सोचना रूक गए हो तुम

शहीदों के संग जुड़ गए हो तुम

वीर तुम बढ़ते जाना

रुकना तेरा काम नहीं।

Poem By Archana Snehi

 

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