माटी का देह Poems in Hindi on Life

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माटी का देह poems in hindi on life

माटी का देह माटी में मिल जाना है
मिलते नहीं दरिया मे किनारा
कश्ती अपने दम पर खींच लाना है
बनते नहीं चट्टानों मे राहे
सुरंग बना पार जाना है।

माटी का देह माटी में मिल जाना है
नदियां तो निर्झर बहती है
कल कल कर यह कहती है
खरपतवारो की नैया है
पार उतर जाना है।

माटी का देह माटी में मिल जाना है
सौगात में मिली जो जमी है
बंजर मे भी फूल खिलाना है
धरती की संताने हम है
इस को स्वर्ग बनाना है ।

माटी का देह माटी में मिल जाना है
पग में पड़े कांटो को चुनकर
रास्ता कोमल बनाना है
अपनी मीठी वाणी से
दिलों मे मिठास घोल जाना है।

माटी का देह माटी में मिल जाना है
बलिदान मांगती यह धरती है
लहू भी मचल कर यह कहती है
तूफानों से लड़ कर भी
अपना कर्ज़ चुकाना है।

माटी का देह माटी में मिल जाना है
कल का सूरज कहता है
उज्जवल भविष्य तुम्हारा है
नन्हे फूल संभाले रखना
आज आए हैं कल जाना है।
माटी का देह माटी मे मिल जाना है।।

Poem By Archana Snehi

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