रानी पद्मावती (पद्मिनी) का इतिहास Rani Padmawati Story in Hindi

Rani Padmawati Story in Hindi

Rani Padmawati Story in Hindi:भारतवर्ष के इतिहास में अनेकों कहानियां ऐसी हैं जिनकी ऐतिहासिक रूप से कोई पुष्टि नहीं हुई है लेकिन फिर भी यह कहानियां हमारे दिलों पर राज करती है इन्हीं में से एक अत्यंत प्राचीन कहानी है Rani Padmawati Story in Hindi चित्तौड़ की रानी पद्मावती की जो प्राचीन काल से ही अपनी बेमिसाल खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं रानी पद्मावती को रानी पद्मिनी भी कहा जाता है चित्तौड़ के राजा रतन सिंह की पत्नी  रानी पद्मावती अपनी रूप की वजह से दूर-दूर तक प्रसिद्ध थी मंत्रमुग्ध करने वाली सुंदरता रानी पद्मावती की ऐतिहासिक कहानी का कारण बना आइए जानते हैं कि इतिहास में दर्ज होने वाला ऐसा कौन सा कारण था Rani Padmawati Story in Hindi

यह उस समय की बात है जब दिल्ली की तख्तो ताज पर अलाउद्दीन खिलजी का राज था जब बादशाह अलाउद्दीन खिलजी को जादूगर राघव चेतन द्वारा रानी पद्मावती की चकित कर देने वाली खूबसूरती का पता चला तो खिलजी के मन में रानी पद्मिनी को पाने की गहन इच्छा जाग उठी आपको बता दें कि राघव चेतन राजा रतन सिंह के महल में संगीतकार था लेकिन वह एक जादूगर भी था यह बात कोई नहीं जानता था जब एक दिन उसका यह सच रंगे हाथों पकड़ा गया तो उसका मुंह काला करके उसे महल छोड़ने का आदेश दिया गया

राघव चेतन यह अपमान सहन नहीं कर सका और राजा रतन सिंह से बदला लेने के लिए अलाउद्दीन खिलजी की शरण में दिल्ली पहुंचा इसके लिए उसने रानी पद्मावती को निशाना बनाया  इसके लिए जब उसने  अलाउद्दीन खिलजी के सामने रानी की खूबसूरती का बखान किया तो खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया उसकी सेना कई महीनों तक चित्तौड़ किले के बाहर डेरा डाले रही परंतु चित्तौड़ पर कोई आंच नहीं आई क्योंकि दुर्ग का निर्माण इस तरह से किया गया था कि आवश्यकता की सारी वस्तुएं किले के अंदर ही मौजूद थी अंततः सुल्तान की सेना का सब्र टूटा और सेना को वापस  लौटना पड़ा Rani Padmawati Story in Hindi

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अलाउद्दीन खिलजी ने राजा रतन सिंह को एक पैगाम भेजा कि वह एक बार रानी  पद्मिनी का दीदार करना चाहता है राजा रतन सिंह इस बात से हैरान तो नहीं हुए पर राजा का कहना था कि यह राजपूती मर्यादा के विरुद्ध है राजपूतों की स्त्रियां पराए पुरुषों के सामने नहीं आती पैगाम में लिखा था कि जिस रूप के दीदार के लिए वह दिल्ली से चित्तौड़ आया अगर उस रूप की एक झलक भी मिल जाए तो उसका सफर सफल हो जाए पैगाम के अनुसार वह सिर्फ रानी की एक झलक दूर से देखना चाहता था और उसने वादा किया था कि वह एक बार रानी पद्मिनी को देखने के बाद दिल्ली वापस लौट जाएगा Rani Padmawati Story in Hindi

जब रानी पद्मिनी तक यह बात पहुंची तो उन्होंने पहले तो इंकार कर दिया लेकिन बहुत सोचने के बाद प्रजा के हित के लिए रानी ने तय किया कि वह अपने महल की सीढ़ियों पर आएंगी और सामने लगे एक कमरे के आईने में अलाउद्दीन रानी का प्रतिबिंब देखेगा इस प्रकार ना तो राजपूती मर्यादा का उल्लंघन होगा और सुल्तान की बात भी रख ली जाएगी रानी महल की सीढ़ियों पर पहुंची और दूसरी तरफ रानी को इतनी दूर से आईने में देख कर ही सुल्तान के  होश उड़ गए रानी की झलक पाने के बाद खिलजी ने राणा रतन सिंह से इजाजत ली और दिल्ली की तरफ रुख किया अतिथि देवो भवः का पालन करते हुए राणा सुल्तान को विदा करने बाहर आए और बातों ही बातों में न जाने कब दुर्ग के सातों द्वार पार कर पहाड़ी के नीचे आ गए मौका देखकर सुल्तान ने अपनी सेना को इशारा किया और राणा को बंदी बना लिया गया और यह संदेश रानी पद्मिनी के पास दिया गया कि यदि राजा जी जिंदा चाहिए तो रानी पद्मिनी को सुल्तान के सामने पेश होना पड़ेगा

रानी के लिए अत्यंत संकट क्षण था उसने अपने मायके के संबंधि गोरा नाम के वृद्ध व्यक्ति को बुलाया घोड़ा और उसका भतीजा रानी की मदद के लिए पधारें रानी ने सुल्तान द्वारा की गई धोखे की बात गोरा के सामने रखी एक लंबी चर्चा के पश्चात रानी के कहे अनुसार गोरा ने अलाउद्दीन खिलजी को संदेश पहुंचाया की रानी पद्मिनी दिल्ली जाने को तैयार हैं लेकिन जाने से पहले रानी पद्मिनी एक बार राणा रतन सिंह से मिलना चाहती है संध्या के समय चित्तौड़गढ़ से 100 पालकियां उतरी खिलजी को भरोसा हो गया की रानी पद्मिनी उसकी खिदमत में पधार रही हैं सुल्तान को बताया गया कि रानी की सखियां उसे विदा देने आई है रानी की पालकी को एक बंद तंबू में उतारा गया और राजा को रानी से मिलने की इजाजत दी गई जब राणा ने लज्जित होकर रानी से माफी मांगी तो जवाब मिला कि वह रानी नहीं बल्कि रानी की वस्त्र में गोरा का भतीजा बादल है बादल ने राणा की जंजीर खोलकर उन्हें आजाद किया और बाहर खड़े घोड़े के द्वारा राणा रतन सिंह को चित्तौड़ किले में भेज दिया गया Rani Padmawati Story in Hindi

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जब तक खिलजी को इस षड्यंत्र की खबर हुई तब तक राणा ने दुर्ग में प्रवेश कर लिया था उधर गोरा  का भतीजा बादल सहित पालकी में सवार सभी सैनिकों ने सुल्तान की सेना पर आक्रमण कर दिया लेकिन जहां सुल्तान की लाखों की संख्या में सेना थी चित्तौड़ की हजारों की सेना कहां तक संघर्ष करती अलाउद्दीन धीरे धीरे किले के दरवाजे पार कर अंदर प्रवेश करने लगा उधर किले में मौजूद बालक तथा युवा से लेकर वृद्ध तक सभी अंतिम युद्ध के लिए कमर कसे हुए थे

जब राजपूत स्त्रियों को पराजय का आभास हो गया तो खिलजी की शरण में जाने से बेहतर उन्हें अपने प्राण त्यागना ज्यादा अच्छा लगा जहां एक ओर पुरुष युद्ध की तरफ निकल पड़े स्त्रियों ने अपने लिए चीता तैयार की जोहर की तैयारि के बाद स्त्रियां मंगल गीत गाती हुई एक एक करके चिता में कूद गई दूसरी ओर केसरिया रंग के वस्त्र पहने हुए राजपूतों के सैनिक युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो रहे थे सवो के ढेर पर से सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने महल में प्रवेश किया तो उसे वहां एक विशाल चिता मिली और इस प्रकार रानी पद्मिनी की बहादुरी की मिसाल को इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया Rani Padmawati Story in Hindi

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