भगवत गीता में कही गई बातें कितनी सच है? Facts about Bhagwat Geeta

भगवत गीता में कही गई बातें कितनी सच है? Scientific Facts about the Bhagwat Geeta

Scientific Facts about Bhagwat Geeta in hindi: भगवत गीता। हां दोस्तों वही भगवत गीता जिसे आपने मंदिरों, अपने बड़े बूढ़ों को पढ़ते हुए देखा होगा। दोस्तों आज हम भगवत गीता से जुड़े हुए कुछ ऐसे साइंटिफिक बातें बताने जा रहे हैं जो भगवत गीता में हजारों साल पहले कही गई थी। और आप यकीन मानो या मत मानो लेकिन आज भी दुनिया के कई महान रिसर्च भगवत गीता को पढ़ते हैं। किसी धार्मिक मकसद के लिए नहीं बल्कि एक प्योर साइंस बुक की तरह। और ऐसी बहुत सारी थ्योरी हैं जिसे आप भगवत गीता में कहीं बातों से रिलेट कर सकते हो।

आपसे विनम्र निवेदन है दोस्तों इस आर्टिकल को एकदम लास्ट तक पढ़िएगा, इसे थोड़ा सा छोड़िएगा मत, क्योंकि मैं चाहता हूं कि आप इसे अच्छे से समझिये, और भगवत गीता को एक नए नजरिए से देखने की कोशिश कीजिये। क्योंकि भले ही आपका भगवान जैसे कोई शक्ति पर भरोसा हो या ना हो लेकिन आपको यह तो पता ही होगा कि हमारे रोज के जीवन में बहुत सारे प्रॉब्लम के सलूशन इस पवित्र बुक में मौजूद है, जिन समस्याओं को लेकर हम काफी परेशान रहते हैं। आप लोगों में से जो लोग भी धार्मिक नहीं हैं उन लोगों से मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं कि आज आप इस बुक को किसी धर्म की बुक की तरह मत देखना, आप इसे एक नॉर्मल बुक समझो, जिसे हजारों साल पहले लिखा गया था।

How true is the saying of Bhagwat Geeta

दोस्तों वैसे तो गीता को साइकोलॉजी के लिए बहुत ही अच्छी बुक माना जाता है। लेकिन लोगों को यह नहीं पता है कि इसमें आपको बायोलॉजी, फिजिक्स, मैथ और एस्ट्रोलॉजी जैसे कई टॉपिक के बारे में कई ऐसी बातें हैं जिन के बेस पर बड़ी-बड़ी खोज यानी की डिस्कवरी हुई है। शुरू करने से पहले मैं एक बात और क्लियर कर दूं कि मैं जो भी बातें इस पोस्ट में बताऊंगा, आप तुरंत जजमेंटल होकर यानी अपनी कोई भी धारणा बनाने से पहले “मेरी लिखी हुई बातों को ध्यान से पढ़ना” और फिर अपना ओपिनियन यानी राय या सुझाव नीचे हमारे कमेंट बॉक्स में मेंशन करना। तो चलिए शुरू करते हैं….

1. थर्मोडायनेमिक्स लॉ

फर्स्ट लॉ ऑफ थर्मोडायनेमिक्स कहता है एनर्जी को ना तो बनाया जा सकता है और ना ही खत्म किया जा सकता है। उसे बस हम एक फॉर्म से दूसरे फॉर्म में कन्वर्ट कर सकते हैं, यानी कि बदल सकते हैं, जिसे हम कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी भी बोलते हैं। एग्जांपल के लिए आपने जनरेटर देखा होगा। उसमें एक मैग्नेटिकपर क्वायल लगी रहती है। जब जनरेटर मैकेनिकलई ही घूमता है तो उसके साथ ओ मैग्नेटिक क्वायल भी घूमती है, और उसी से इलेक्ट्रिसिटी पैदा होती है। यानी वह मैकेनिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिक एनर्जी में कन्वर्ट करता है, इस law को गीता में कुछ इस तरह से बताया गया है…..

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भगवत गीता के अध्याय 2 श्लोक 23 में लिखा है कि हमारी आत्मा यानी कि ‘सोल एनर्जी’ (Soul Energy) कभी खत्म नहीं होती, वह बस अपना शरीर बदलती है। अब अगर आप सोच रहे हो कि यहां तो आत्मा की बात हो रही है, तो इसका एनर्जी से क्या लेना देना। यार आत्मा भी तो एक एनर्जी ही हैं। ‘मॉडर्न साइंस’ भी इसे एक एनर्जी ही मानता है जो कि हमारे मरने के बाद हमारे बॉडी से रिलीज होती है। अब चाहे वह बड़े अमाउंट में हो या फिर बहुत ही छोटे अमाउंट में, लेकिन कोई तो ऐसी एनर्जी है जो हमारे बॉडी से रिलीज होती है। इसे बहुत ध्यान से समझो….. क्योंकि इतने सालों पहले किसी ने यह idea यानी कि इस थ्योरी का बेस दिया था। जिसे आज मॉडिफाई रूप से आप ‘कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी’ बोलते है।

2. मेडिटेशन

चाइना और जापान के कुछ ऐसे मेडिटेशन टेक्निक्स हैं जिससे हम अपने सब कॉन्शियस माइंड को कंट्रोल कर सकते हैं। या फिर हम इसे डेली रूटीन में प्रयोग करके अपने स्ट्रेस यानी तनाव, गुस्से और फोकस ना रह पाने की प्रॉब्लम को दूर कर सकते हैं। और अपने ‘पीस ऑफ माइंड’ यानी कि अपने मन को शांत करके अपनी प्रॉब्लम का सलूशन ढूंढ सकते हैं। लेकिन भगवत गीता के अध्याय 6 जिसका नाम है “ध्यान योगा” उसमें इन टेक्निक्स की सारी डिटेल और उसके फायदे बताए गए हैं। ऐसी टेक्निक्स जिसे चाइना और जापान अपना बताते हैं। असल में वह सभी साइंटिफिक टेक्निक को गीता के चैप्टर 6 में बहुत ही अच्छे से समझाया गया है।

3. आर्टिफिशियल लाइफ

भगवत गीता में लिखा है….  अहम वीजा प्रदाह पिता

इसका मतलब है कि इस दुनिया की सारी जिंदगी यानी लाइफ किसी एक दूसरे लाइफ से पैदा होती है, यानी ‘स्पोंटेनियस जनरेशन’ जैसी कोई भी चीज नहीं होती है। स्पोंटेनियस जनरेशन का मतलब “ऐसी जिंदगी जो किसी ‘नॉन लिविंग’ यानी मटेरियल से पैदा हुई है” उदाहरण के लिए एक ऐसा लिविंग सेल जो किसी नॉन लिविंग थिंग यानी एक मशीन से पैदा हुआ हो तो उसे हम स्पोंटेनियस जनरेशन कहेंगे।

अब आप में से कुछ लोगों ने इस थ्योरी के बारे में सुना होगा जिसमें यह बताया गया है कि लाइफ मैटर से क्रिएट की जा सकती है। लेकिन सबसे पहले मैं आपको बतला दूं कि यह कोई थ्योरी नहीं है,वल्कि  यह एक हाइपोथिसिस है यानी कि यह सिर्फ एक कल्पना है। किसी ने आज तक यह प्रूफ नहीं किया है की लाइफ को मैटर से क्रिएट किया जा सकता है। बल्कि एक साइंटिस्ट लुइस पाश्चर( Louis Pasteur) ने अपनी ‘थ्योरी ऑफ स्पोंटेनियस जनरेशन’ में यह दिखाया है की स्पोंटेनियस जनरेशन से लाइफ नहीं बनाई जा सकती। उन्होंने ही सबसे पहले ‘पैसराईजेसन टेक्निक्स’ को खोजा था।

उन्होंने दूध को उबालकर पैसेराइज कर दिया यानी कि उसमें से सभी जीवित चीजों को निकाल दिया। जिसकी वजह से वह दूध काफी महीनों तक खराब नहीं होता था, यानी कि उसमें कोई फंगस नहीं पड़ता था। दोस्तों फंगस एक तरह का लिविंग बैक्टीरिया होता है, इस एक्सपेरिमेंट से उन्होंने यह साबित किया कि लाइफ स्पोंटेनियस जनरेशन से नहीं बनाई जा सकती। और भगवत गीता में भी यह बात कही गई है।

4.  सिमुलेशन

‘एलोन मस्क’ और ‘स्टीफन हॉकिंस’ जैसे बड़े फ्यूचरिस्टिक यानी कि हमेशा दूर की सोचने वाले लोगों ने यह कहा है कि हमारी दुनिया एक मायाजाल यानी एक सिमुलेशन हो सकती है। सिमुलेशन का मतलब होता है दोस्तों, जहां हम सोचने पर मजबूर हो जाते हैं की कहीं हमारी यह दुनिया एक सिमुलेशन यानी कंप्यूटर प्रोग्राम तो नहीं है। भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने इस दुनिया को एक मायाजाल यानी मैट्रिक्स बताया है। उनके कहने के मुताबिक यह हुआ है वह इस दुनिया के प्रोग्रामर है। और यह यूनिवर्स एक कंप्यूटर प्रोग्राम है। और यैसे बहुत सारे यूनिवर्स यानी कंप्यूटर प्रोग्राम मौजूद हैं, जिसके लिए अलग-अलग डेवलपर्स हैं।

लोगों का ऐसा भी कहना है कि जब ब्रह्मा जी को घमंड हुआ था कि उन्होंने इस दुनिया का निर्माण किया है। तब श्री भगवान् कृष्ण ने अलग-अलग ब्रह्मा जी को बुलाकर उनका यह भ्रम तोड़ा था। यानी कि उन्होंने अलग-अलग ब्रह्मांड के डेवलपर्स को बुलाया था।

मल्टी यूनिवर्स की थ्योरी भगवत गीता में हजारों साल पहले ही बताई गई थी। जिसे आज साइंटिस्ट एक बहुत स्ट्रांग हाइपोथिसिस मानते हैं। जैसे हमारी दुनिया से सभी कंप्यूटर किसी नेटवर्क से जुड़े हुए होते हैं, उसी तरह अलग-अलग यूनिवर्स यानी कंप्यूटर प्रोग्राम भी आपस में किसी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। और उस नेटवर्क का नाम है ब्लैक होल।

‘मल्टी यूनिवर्स’ और ‘पैरेलल यूनिवर्स’ हाइपोथिसिस में यह माना गया है कि कोई भी चीज ‘ब्लैक होल’ में चला जाती है तो वह किसी दूसरे कंप्यूटर सिमुलेशन यानि किसी दूसरे यूनिवर्स में चली जाती हैं।

क्या आपने कभी सोचा था भगवत गीता में इतनी एडवांस थ्योरी का भी वर्णन हो सकता है। ऐसे और भी बहुत सारी बातें हैं जो साइंस और साइकोलॉजी के फील्ड में गीता में कही गई सभी बातों को सही साबित करती है। आपको शायद यह बात पता नहीं होगी की भगवत गीता सिर्फ हिंदी में ही नहीं बल्कि इंग्लिश, जापानीज, चाइनीस, जर्मन और बहुत सारे लैंग्वेज में पब्लिश हो चुकी है। और हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए कि हमारे पास एक ऐसे ज्ञान का भंडार है जिसे पूरी दुनिया जानना चाहती है।

मगर भारत में लोग “भगवत गीता” को एक धार्मिक किताब समझते हैं और इसीलिए ओ यह सोचते हैं कि उसमें बस भगवान और उनकी ही बातें लिखी होगी। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है।

आज तो मैंने आपको गीता और साइंस के बीच के रिलेशन का 0.1 पर्सेंट भी नहीं बताया है। गीता में बहुत सारी बातें लिखी हैं जो आज साइंस ने साबित करी हैं। और अगर आपको अपनी लाइफ के कुछ बड़े डिसीजन लेने हैं या फिर किसी ऐसे प्रॉब्लम का सलूशन निकालना है जो आपका पीछा ही नही छोड़ रही तो, आपको गीता पढ़ना जरूर शुरू करना चाहिए। अगर आप उसमें लिखी सभी बातों को समझ गए, तो आपके पास कोई भी ऐसा सवाल नहीं बचेगा जिसका जवाब आपके पास नहीं होगा।

दोस्तों आपको हमारा यह पोस्ट “Scientific Facts about the Bhagwat Geeta” कैसा लगा क्या इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको भगवत गीता को देखने का नजरिया चेंज हुआ, नीचे कमेंट करके जरूर बताइएगा।

और अगर आपको हमारा पोस्ट पसंद आता है तो आप हमारे पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिए। धन्यवाद॥

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