शिव पुराण क्या है? Shiva Purana in Hindi

Shiva Purana in Hindi

Shiva Purana in Hindi: दोस्तों  शिव का अर्थ होता है कल्याण। इस पुराण भगवान शिव के लीलाओं और उनके महात्मय से भरा पड़ा है। इसीलिए इस पुराण को शिव पुराण कहते है। भगवान शिव को पापों का नाश करने वाले देव् है। तथा भगवान् शिव बड़े ही सरल स्वभाव के हैं। इसीलिए उनका एक नाम भोलेनाथ भी है। अपने नाम के ही अनुसार भगवान शिव बड़े ही भोले भाले और शीघ्र ही अपने भक्तों पर प्रसन्न होने वाले देवता हैं। भगवान शिव कम समय में ही अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उन्हें मनवांछित फल प्रदान करते हैं। दोस्तों शिव पुराण में 24000 श्लोक हैं। इस पुराण में भगवान शिव की महानता और उनसे संबंधित घटनाओं को संकलित किया गया है। इस ग्रंथ को वायुपुराण भी कहा जाता है। इस पुराण में 12 संहितायें हैं।

शिव पुराण के 12 संहिताओं के नाम हैं।

1. विघ्नेश्वर संहिता   2.     रौद्र संहिता              3.     वैनायक संहिता

4. भौम संहिता          5.     मात्र संहिता                6.     रूद्रएकादश संहिता

7. कैलाश संहिता       8.     शत् रूद्र संहिता          9.     कोटि रूद्र संहित

10. सहस्र कोटि रूद्र संहिता        11.   वायवीय संहिता       12.   धर्म संहिता

 

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शिव पुराण के अनुसार इस ग्रंथ के इन संहिताओं का श्रवण करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। तथा शिव धाम की प्राप्ति हो जाती है। शिव पुराण के अनुसार कथा है की….Shiva Purana in Hindi

एक बार जब जल में नारायण शयन कर रहे थे, तभी उनकी नाभि से एक सुंदर और विशाल कमल प्रकट हुआ। उस कमल से ब्रह्मा जी की जन्म (उत्पत्ति) हुआ। माया के वश में होने के कारण ब्रह्माजी अपनी उत्पत्ति का कारण नहीं जान सके। उन्हें चारों ओर जल ही जल दिखाई पड़ा। तब उन्होंने एक आकाशवाणी सुनी… आकाशवाणी ने उनसे कहा कि तुम तपस्या करो। लेकिन माया के वश में ब्रह्माजी श्री हरि विष्णु जी के स्वरूप को ना जानकर उनसे युद्ध करने लगे। तब ब्रह्मा जी और विष्णु जी के विवाद को शांत करने के लिए एक अद्भुत ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ। दोनों देव बड़े आश्चर्य होकर इस दिव्य ज्योतिर्लिंग को देखते रहे। और देखते ही देखते उस ज्योतिर्लिंग का स्वरूप जानने के लिए ब्रह्मा जी ने अपना स्वरूप हंस का बनाकर ऊपर की ओर, और भगवान विष्णु वराह का स्वरूप धारण कर नीचे की ओर चले गए। लेकिन दोनों देवों को इस दिव्य ज्योतिर्लिंग के आदि और अंत का पता नहीं चल सका।

इस प्रकार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु को इस दिव्य ज्योतिर्लिंग का आदि और अंत ढूंढने में सौ वर्ष बीत गए। इसके पश्चात उस दिव्य ज्योतिर्लिंग से उन्हें ‘ओमकार’ का शब्द सुनाई पड़ा। और उस ज्योतिर्लिंग में पंचमुखी एक मूर्ति दिखाई पड़ी… यही भगवान शिव थे। ब्रह्मा और भगवान विष्णु ने उन्हें प्रणाम किया। तब भगवान शिव ने कहा तुम दोनों मेरे ही अंश से उत्पन्न हुए हो। और फिर भगवान शिव ने ब्रह्मा जी को सृष्टि की रचना, भगवान विष्णु को सृष्टि का पालन करने की जिम्मेदारी प्रदान की। शिव पुराण में 24000 श्लोक हैं। इस पुराण में तारकासुर वध,  मदन दाह, पार्वती जी की तपस्या, शिव पार्वती विवाह, कार्तिकेय का जन्म, त्रिपुर का वध, केतकी के पुष्प शिव पुजा में निषेद्य, रावण की शिव-भक्ति आदि प्रसंग वर्णित किये गए हैं। Shiva Purana in Hindi

भगवान शिव पूजा से अपने भक्तों पर शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं। कहा जाता है भगवान शिव अपने भक्तों को कष्ट में नहीं देख सकते, और तुरंत ही अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उसे अभीष्ट फल प्रदान करते हैं। भगवान शंकर का ही एक नाम नीलकंठ महादेव है। जब एक बार देवता और असुर लोगों ने मिलकर समुद्र से अमृत प्राप्ति के लिए उसका मंथन किया। तो सबसे पहले समुन्द्र से भयंकर विश निकला।जिससे समस्त देवता, दानव-मानव, सभी झुलसने लगे। तब भगवान देवा दी देव महादेव शिव शंकर ने ही प्राणियों एवं जीव-जगत की रक्षा हेतु उस भयानक विश को अपने कंठ में धारण कर लिया। दोस्तों तब से भगवान शंकर का एक नाम नीलकण्ठ महादेव पड़ गया।

शिव पुराण सुनने का फल:

इस पुराण में यह वर्णन आया है कि जो भी श्रद्धा के साथ भगवान शिव के चरणों में ध्यान लगाकर शिव पुराण की कथा को पढ़ता या सुनता है  वह जन्म-मरण के बन्धन से मुक्त हो जाता है और और अंत भगवान् शिव के परम धाम को प्राप्त करता है। अन्य देवो की अपेछा भगवान शिव अपने भक्तों पर जल्द ही प्रसन्न हो जाते है। और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।जो शिव पुराण की कथा श्रवण करते हैं उन्हें कपिला गायदान के बराबर फल मिलता है। पुत्रहीन को पुत्र, मोक्षार्थी को मोक्ष प्राप्त होता है तथा उस जीव के कोटि जन्म पाप नष्ट हो जाते हैं और शिव धाम की प्राप्ति होती है। इसलिये शिव पुराण कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिये। इसलिए हर मनुस्य को अपने जीवन में एक बार इस गोपनीय पुराण को पढ़ना या इसकी कथा अवश्य ही सुननी चाहिए। Shiva Purana in Hindi

शिव पुराण करवाने का मुहूर्त:

शिवपुराण की कथा करवाने के लिए सर्वप्रथम विद्वान ब्राह्मणों से उत्तम मुहूर्त निकलवाना चाहिए इस पुराण के लिए श्रावण-भाद्रपद, आश्विन, अगहन, माघ, फाल्गुन, बैशाख और ज्येष्ठ मास शुभ माना जाता है। लेकिन विद्वान ब्राह्मणों के अनुसार जिस दिन ब्रह्म पुराण की कथा प्रारंभ की जाए वही शुभ मुहूर्त है।

शिव पुराण का आयोजन कहां करें:

इसे करवाने के लिए अत्यधिक पवित्र स्थान होना चाहिए। विद्वानों के अनुसार जन्म भूमि में ब्रह्म पुराण करवाने का विशेष महत्व बताया गया है। इसके अतिरिक्त तीर्थ स्थल पर भी ब्रह्म पुराण की कथा का आयोजन कर आप उसका फल प्राप्त कर सकते हैं। फिर भी मन को जहां संतोष पहुंचे उसी स्थान पर कथा सुनने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

शिव पुराण करने के नियम:

शिवपुराण का वक्ता विद्वान ब्राह्मण होना चाहिए। जिसे शास्त्रों और वेदों की बहुत अच्छी जानकारी हो। शिव पुराण में सभी ब्राह्मण सदाचारी और अच्छे आचरण वाले हो। वह हर दिन संध्या वंदन और प्रतिदिन गायत्री जाप करते हो। इस कथा को करवाने में ब्राह्मण और यजमान दोनों 7 दिनों तक उपवास रखें। केवल एक ही समय भोजन ग्रहण करें। भोजन शुद्ध शाकाहारी होना चाहिए। अगर स्वास्थ्य खराब हो तो भोजन कर सकते हैं। Shiva Purana in Hindi

शिव पुराण में कितना धन लगता है?

दोस्तों इस भौतिक युग में धन के बिना कुछ भी संभव नहीं हैं। और धर्म ग्रन्थ में भी वर्णन हैं की बिना धन के धर्म नहीं होता हैं। पुराणों में लिखा हैं की अपने पुत्री के विवाह में जितना धन खर्च हो उतना ही धन शिव पुराण की कथा की आयोजन में लगाना चाहिए।और पुत्री के विवाह में जितनी ख़ुशी हो उतने ही ख़ुशी मन से शिव पुराण की कथा करनी चाहिए।

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1 COMMENT

  1. Bramha or Shree Hari Vishnu Narayan ke madya jo jyotirlinga ke Ant ko dhoondne ki jo khoj hui wah niradhaar hai. Aisa katai sambhaw nahi ki Shree Hari ko us jyotirlinga ka chor na pata ho ..

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