सौर ऊर्जा से जुड़े अद्भुत रहस्य Solar Energy Definition in Hindi

Solar Energy Definition in Hindi

Solar Energy Definition in Hindi: सूर्य हमारी सौर व्यवस्था की सबसे बड़ी शक्ति है थर्मो न्यूक्लीयर विस्फोटों की एक ऐसी विशाल भट्टी जिसमें हर पल ऊर्जा (Solar Energy) की भयानक विस्फोट होते हैं और भार में माउंट एवरेस्ट की जितनी ऊर्जा हर सेकंड सूर्य से निकलकर अंतरिक्ष में फैल जाती है। ब्रह्मांड में भले ही तारों की संख्या करोड़ो-अरबों में हो पर हमारी शौर व्यवस्था पर तू सूर्य ही रही राज करता है।

Solar Energy Definition

एक विशाल आकार का दहकता आग का गोला जो हाइड्रोजन और हीलियम से बना है और जिस में प्लाज्मा पदार्थ लाखों डिग्री तापमान पर उबलता रहता है। सूर्य की सतह पर हर समय भयानक विस्फोट होते रहते हैं जिन से निकलती गर्मी और रेडिएशन अंतरिक्ष में आंखों में दूर तक फैल जाते है। हमारा सूर्य अपनी सतह के पीले रंग और छोटी आकर की वजह से पीले वाले तारे की श्रेणी में आता है। पर सूर्य का छोटा आकार के 1 ब्रह्मांड के दूसरे तारों के मुकाबले ही छोटा है लेकिन हमारी शोर व्यवस्था में इससे ऊपर कोई नहीं है

हमारे सौरमंडल का 99% से ज्यादा पदार्थ केवल सूर्य में मौजूद है और बाकी बची 1% से भी कम में बाकी का सौरमंडल बना है। सूर्य  इतना विशाल है कि इसमें लाखों पृथ्वी समां सकती है। सूर्य हमारी सौर व्यवस्था का एकमात्र सबसे बड़ा तारा है जो कई ग्रहों चंद्रमा छोटे-बड़े पिंडों और उल्काओं से घिरा है। यह ऊष्मा और ऊर्जा दोनों का ही विशाल भंडार है। जिस की सतह का तापमान ही तक़रीबन 5000 डिग्री सेल्सियस है और जो 38 हजार करोड़ अरब मेगावाट ऊर्जा Solar Energy पैदा करता है। यह कितना ज्यादा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि धरती का सबसे बड़ा पावर स्टेशन केवल 22500 मेगावाट ऊर्जा ही पैदा करता है।

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सूर्य केवल 1 सेकंड में ही इतनी ऊर्जा Solar Energy पैदा करता है जितनी समूची मानव इतिहास में मिलकर आज तक कभी पैदा नहीं हुई और इस तरह से सूर्य को चमकते हुए अरबों साल गुजर चुके हैं। एक सदी पूर्व तक माना जाता था कि सूर्य भी धरती पर जलने वाले किसी सामान्य से इंधन की ढेर की तरह जल रहा है जिसमें वैज्ञानिक हमेशा इस सोच में रहते थे कि अगर सूर्य सामान्य इंधन की ढेर की तरह जल रहा है तो वह अब तक खत्म क्यों नहीं हुआ। सूर्य के द्रव्यमान को देखा जाए तो वह अब तक जलकर खत्म हो जाना चाहिए था लेकिन सूर्य को इसी तरह से जलते हुए कई साल बीत चुके हैं। अगर हम इस सूर्य जितने बड़े पिंड को इतनी समय तक जलाकर रखना हो तो हमें कई सौ खरब पेड़ों की लकड़ियों को प्रयोग में लाना होगा। तो हमारी सूर्य के खत्म होने वाले ईंधन के पीछे आखिर क्या राज है?

सन 1920 में सूर्य की इस रहस्य से भी पर्दा उठ गया वैज्ञानिकों ने पाया कि सूर्य की इतनी कम रफ्तार से जलने के पीछे नाभिकीय संलयन यानी न्यूक्लियर फ्यूजन प्रोसेस है जिसके आधार पर हाइड्रोजन बम काम करता है। सूर्य के अंदर हाइड्रोजन के कारण केंद्र के बहुत ज्यादा दवा की वजह से आपस में टकराकर हिलियम की नए कणों को जन्म देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में बनने वाली नई हिलियम कण पुरानी हाइड्रोजन के कणों से थोड़ी से कम डांस यानी हल्के होते हैं, और जो भार इन कणो ने खोया है वह उर्जा बन कर बाहर निकलता है। इस तरह से हर सेकेंड सूर्य के अंदर 60 करोड़ मीट्रिक टन हाइड्रोजन 459 करोड़ मैट्रिक टन हिल्लीउम में बदलती है और बाकी बची 5000000 टन हाइड्रोजन इस प्रोसेस के दौरान ऊर्जा में बदल जाती है जो कि एक अरब मेगा टन हाइड्रोजन बम के बराबर है। सूर्य इतनी ऊर्जा केवल 1 सेकंड में जला देता है Solar Energy Definition

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अब हम जानते हैं कि वास्तव में सूर्य न्यूक्लियर फ्यूजन प्रोसेस पर आने वाले कई अरबों साल तक और जलता रहेगा न्यूक्लियर फ्यूजन पर कई दशकों से वैज्ञानिक काम कर रहे हैं यह एक ऐसी ताकत है जिसे अगर कंट्रोल कर लिया जाए तो मानव जाति अगले कई करोड़ सालों तक ना खत्म होने वाली ऊर्जा के भंडार बना सकती है। पूरी दुनिया में न्यूक्लियर फ्यूजन प्रोसेस को नियंत्रित रूप से संपन्न करने की दिशा में खोजे हो रही है जिसमें इंटरनेशनल थर्मो नूक्लेअर एक्सपेरिमेंट रिएक्टर सबसे ज्यादा प्रभावी है। यूरोप चीन जापान रूस अमेरिका और भारत इस सामूहिक खोज के सदस्य हैं।

न्यूक्लियर फ्यूजन को हम कब कंट्रोल कर पाएंगे यह तो पता नहीं पर सूर्य से आती धूप भी हम मानवों के लिए ऊर्जा Solar Energy का एक कभी खत्म होने वाला स्रोत है। धूप जिसके बिना धरती पर जीवन की कल्पना करना तक असंभव है जो कई करोड़ सालों से धरती को जीवन देती आई है। यह हमारे लिए एकदम वफात में उपलब्ध ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमें जीवन देने वाली यह धूप Solar Energy हम तक कैसे पहुंचती है सूर्य की रोशनी की धरती तक आने के पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी छिपी है।

सूर्य की कोर यानी केंद्र में हो रहे न्यूक्लियर फ्यूजन में बन रही ऊर्जा ऊष्मा और रोशनी के कणों के रूप में बाहर निकलती है जिन्हें हम फोटोस भी कहते हैं। इन फोटोस को धरती पर आने के लिए एक बेहद लंबा सफर तय करना होता है जिसमें इन्हीं 170000 साल लगते हैं।

सूर्य इतना विशाल है कि उसके केंद्र में बन रही ऊर्जा को उसकी सतह तक आने में ही लाखों साल लग जाते हैं यानि जो धूप Solar Energy अभी हम ले रहे हैं उसके बनने की शुरुआत आज से 170000 साल पहले हुई थी।

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