स्वास्तिक चिन्ह का रहस्य Swastika Symbol Mystery in Hindi

Swastika Symbol Mystery in Hindi: स्वास्तिक का चिन्ह जिसे हम बचपन से देखते आ रहे हैं हमने अक्सर देखा है कि जब भी कोई शुभ कार्य का शुभारंभ होता है तो स्वास्तिक का चिन्ह का निर्माण किया जाता है साधारणता स्वास्तिक के चिन्ह के जन्म के बारे में हम सिर्फ इतना ही जानते हैं कि यह चिन्ह सौभाग्य का प्रतीक है और किसी भी शुभ कार्य में इसका इस्तेमाल किया जाता है पर क्या आप यह जानते हैं कि यह स्वास्तिक का चिन्ह आखिर है क्या किसने इसका निर्माण किया और क्यों आखिर स्वास्तिक के चिन्ह की आकृति ऐसी क्यों है इसे लाल रंग में ही क्यों बनाया जाता है क्या आप को यह पता है कि स्वास्तिक का चिन्ह मानव सभ्यता के मूल से ही व्याप्त था क्या आपको यह पता है कि हजारों वर्ष पूर्व मानव सभ्यता अपने भवनों में इस मंगल कारक चिन्ह का प्रयोग किया करती थी यह चिन्ह सिर्फ हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि अनेकों धर्म में इसे मान्यता प्राप्त है दोस्तों आज हम आपको स्वास्तिक चिन्ह के संबंध में सारी जानकारियां देंगे Swastika Symbol Mystery in Hindi जिसे जानकर आपको स्वास्तिक चिन्ह के अपार शक्तियों का ज्ञान होगा

स्वस्तिक चिन्ह का क्या महत्व हैं ?

स्वास्तिक चिन्ह का रहस्य Swastika Symbol Mystery in Hindi 1

वैदिक ऋषि ने अपने आध्यात्मिक अनुभव के आधार पर कुछ विशेष चिन्हों मंगल भाव को प्रकट करने वाले और जीवन में खुशियां भरने वाले इन चिन्हों में से एक है स्वास्तिक, उन्होंने स्वास्तिक चिन्ह के रहस्य को वास्तविक उजागर किया और इसके धार्मिक ज्योतिष और वास्तु के महत्व को बताया आज स्वास्तिक को प्रत्येक धर्म और संस्कृति में अलग-अलग रूपों में इस्तेमाल किया जाता है सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में ऐसी चिन्ह और अवशेष प्राप्त हुए हैं जिससे यह प्रमाणित होता है कि कई हजार वर्ष पूर्व मानव सभ्यता अपने भवनों में इस मंगल कार्य चिन्ह का प्रयोग किया करती थी सिंधु घाटी से प्राप्त मुद्रा और और बर्तनों में स्वास्तिक का चिन्ह खुदा हुआ मिला उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाओं में भी स्वास्तिक के चिन्ह मिले हैं ऐतिहासिक साक्ष्यों में स्वास्तिक का महत्व भरा पड़ा है मोहनजोदड़ो हड़प्पा संस्कृति अशोक के शिलालेखों रामायण, हरिवंश पुराण, महाभारत आदि में स्वास्तिक का अनेकों बार उल्लेख मिलता है Swastika Symbol Mystery in Hindi

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किसी भी शुभ कार्य का आरंभ करने के पहले हिंदू धर्म में स्वास्तिक का चिन्ह ने बनाकर उसकी पूजा करने का महत्व है मान्यता है कि ऐसा करने से सभी कार्य सफल होते हैं स्वास्तिक के चिन्ह को मंगल का प्रतीक माना गया है स्वास्तिक शब्द को सू और अस्ति का मिश्रण योग माना जाता है यहां शु का अर्थ है शुभ और अस्थि से तात्पर्य है होना अर्थात स्वास्तिक का मौलिक अर्थ है शुभ हो यानी कल्याण हो स्वास्तिक चिन्ह में एक दूसरे को काटते हुए दो सीधी रेखाएं होती है जो आगे चलकर मुड़ जाती है इसके बाद भी यह रेखाएं अपने सिरों पर थोड़ी आगे की तरफ मुड़ी होती है स्वास्तिक की आकृति दो प्रकार की हो सकती है

प्रथम स्वास्तिक इसमें रेखाएं इंगित करती हुई हमारी दाई और मूर्ति है इसे दक्षिणावर्त स्वास्तिक कहते हैं दूसरी आकृति पीछे की ओर संकेत करती हुई हमारी बाईं ओर मुड़ती है इसे वामावर्त स्वस्तिक कहते हैं

स्वास्तिक को 7 अंगुल 9 अंगुल और 9 इंच के प्रमाण में बनाए जाने का विधान है मंगल कार्यों के अवसर पर पूजा स्थान और दरवाजे के चौखट स्वास्तिक बनाने की परंपरा है यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य के दौरान स्वास्तिक का पूजन करना अति आवश्यक माना गया है लेकिन असल में स्वास्तिक का चिन्ह क्या दर्शाता है इसके पीछे ढेरों तथ्य हैं

दोस्तों स्वास्तिक में चार प्रकार की रेखाएं होती हैं जिनका आकार एक समान होता है मान्यता है कि यह रेखाएं चारों दिशाओं पूरब पश्चिम उत्तर एवं दक्षिण की ओर इशारा करती है लेकिन हिंदू मान्यताओं के अनुसार यह रेखाएं चारों वेदों जैसे कि रिंग वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और सामवेद का प्रतीक है कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह चार रेखाएं सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा के चारों सिरों को दर्शाती है मान्यता है कि यदि स्वास्तिक के चारों रेखाओं को भगवान ब्रहमा के चारों सिरों के सामान माना गया है तो फल स्वरुप मध्य में मौजूद बिंदु भगवान विष्णु की नाभि है जिनमें से भगवान ब्रहमा प्रकट होते हैं इसके अलावा यह मध्य भाग संसार के एक धुर से शुरू होने की ओर भी इशारा करता है मान्यता है कि स्वास्तिक में भगवान गणेश और देवर्षि नारद की शक्तियां निहित है स्वास्तिक को भगवान श्री हरि विष्णु और भगवान सूर्य का आसन माना जाता है स्वास्तिक का बायां हिस्सा भगवान श्री गणेश कि शक्ति का स्थान गन बीज मंत्र होता है इसमें जो चार बिंदिया होती है उनमें गौरी, पृथ्वी, कच्छप और अनंत देवताओं का वास होता है इस मंगल प्रति गणेश की उपासना धन और वैभव की देवी लक्ष्मी के साथ बही-खाता कि पूजा आदि में विशेष स्थान है

स्वास्तिक मानव जीवन और समय का प्रतीक भी है वैदिक धर्म मैं स्वास्तिक को भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है स्वास्तिक के चारों लकीरो से चारों युगों का पता चलता है यह चार युग हैं सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलयुग

रहस्यमयी स्वास्तिक के निशान से चारों वर्ण ब्राह्म, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र का पता चलता है स्वास्तिक से चार आश्रम ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास का ज्ञान मिलता है चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का ज्ञान मिलता है चारों वेद आदि के बारे में पता चलता है स्वास्तिक के चारों भुजाओं से धर्म के सिद्धांतों का बोध होता है चारों दिशाओं में भगवान का दर्शन एक समान होता है Swastika Symbol Mystery in Hindi

स्वास्तिक की चार रेखाएं एक घड़ी की दिशा में चलती है जो संसार के सही दिशा में चलने का प्रतीक है हिंदू मान्यताओं के अनुसार अगर स्वास्तिक के आसपास एक गोलाकार रेखा खींच दी जाए तो यह सूर्य भगवान का चिह्न माना जाता है वह सूर्य भगवान जो समस्त संसार को अपनी उर्जा से रोशनी प्रदान करते हैं हिंदू धर्म के अलावा स्वास्तिक का और भी कई धर्म में महत्व है बौद्ध धर्म में स्वास्तिक को अच्छे भाग्य का प्रतीक माना गया है यह भगवान बुद्ध के पदचिन्हों को दर्शाता है इसीलिए इसे इतना पवित्र माना जाता है कि स्वास्तिक भगवान बुद्ध के ह्रदय, हथेली और पैरों में भी अंकित है

वैसे तो हिंदू धर्म में स्वास्तिक का प्रयोग सबसे उच्च माना गया है लेकिन हिंदू धर्म से भी ऊपर स्वास्तिक ने यदि कहीं मान्यता हासिल की है तो वह है जैन धर्म हिंदू धर्म से भी ज्यादा मान्यता स्वास्तिक का जैन धर्म है जैन धर्म में यह सातवीं जैन का प्रतीक है जिसे सब तीर्थंकर सुपारस नाथ के नाम से जानती है श्वेतांबर जैनी स्वास्तिक को अष्टमंगल का मुख्य प्रतीक मानते हैं सिंधु घाटी की खुदाई के दौरान स्वास्तिक प्रतीक चिन्ह मिला है ऐसा माना जाता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग भी सूर्य पूजा को महत्व देते थे हड़प्पा सभ्यता के लोग का व्यापार संबंध ईरान से भी था Swastika Symbol Mystery in Hindi

स्वास्तिक चिन्ह का रहस्य Swastika Symbol Mystery in Hindi 2

द्वितीय विश्व युद्ध के समय एडोल्फ हिटलर ने उल्टे स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर अपनी सेना के प्रतीक के रूप में शामिल किया था सभी सैनिकों के वर्दी एवं टोपी पर यह उल्टा स्वास्तिक का चिन्ह अंकित था कहा जाता है कि यही उल्टा स्वास्तिक अडोल्फ़ हिटलर के बर्बादी का कारण बना संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक सेना के नेटिव अमेरिकन की एक 45 में मिलिट्री इनवेंटेड डिवीजन का चिन्ह एक पीले रंग का स्वास्तिक था नाजियों के घटना के बाद इसे हटा कर उन्होंने गरूर का चिन्ह अपनाया

पवित्र स्वास्तिक के चिन्ह को भारत में ही नहीं अपितु विश्व के कई अन्य देशों में भी विभिन्न स्वरूपों में मान्यता प्राप्त है जर्मनी, यूनान, फ्रांस, रोम, मिस्र, ब्रिटेन, अमेरिका, सिफि़लिस, स्पेन, सीरिया, तिब्बत, स्पेन, चीन, साइप्रस, और जापान आदि देशो में भी स्वास्तिक का प्रचलन कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में मिलता है प्राचीन यूरोप में सेल्ट नामक एक सभ्यता थी जो जर्मनी से इंग्लैंड तक फैली थी वह स्वास्तिक को सूर्य देव का प्रतीक मानती थी उनके अनुसार स्वास्तिक यूरोप के चारों मौसमों का प्रतीक भी था Swastika Symbol Mystery in Hindi

मिश्र और अमेरिका में स्वास्तिक का काफी प्रचलन रहा है इन दोनों जगहों के लोग पिरामिड को पुनर्जन्म से जोड़कर देखा करते हैं प्राचीन मिस्र में ‘वो-सिटीज’ को पुनर्जन्म का देवता माना जाता था और हमेशा उसे चार हाथ वाले तारे के रूप में बताने के साथ ही साथ पिरामिड को सूली लिखकर भी दर्शाते थे इस तरह हम देखते हैं कि स्वस्तिक का प्रचलन प्राचीन काल से ही हर देशों की सभ्यता में प्रचलित रहा है

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मध्य एशिया के देशों में भी स्वास्तिक का निशान मंगल एवं सौभाग्य का सूचक माना जाता है प्राचीन इराक में अस्त्र शस्त्र पर विजय प्राप्त करने हेतु स्वास्तिक के चिन्ह का प्रयोग किया जाता था प्राचीन ग्रीस के लोग इसका इस्तेमाल किया करते थे पश्चिमी यूरोप में बाल्टिक से बाल्कन तक इसका इस्तेमाल देखा गया है यूरोप के पूर्वी भाग में बसे यूक्रेन में 1 नेशनल म्यूजियम स्थित है इस म्यूजियम में कई तरह के स्वास्तिक चिन्ह देखे जा सकते हैं जो कि 15000 साल तक पुराने हैं

यह सभी तथ्य हमें बताते हैं कि केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के कोने कोने में स्वास्तिक चिन्ह ने अपनी जगह बनाई है फिर चाहे वह सकारात्मक दृष्टि से हो या नकारात्मक दृष्टि से परंतु भारत में स्वास्तिक चिन्ह को हमेशा से ही सम्मान दिया गया है और इस को विभिन्न रूपों में इस्तेमाल किया जाता है

स्वास्तिक चिन्ह केवल लाल रंग में ही क्यों बनाया जाता है?

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दोस्तों भारतीय संस्कृति में लाल रंग को सर्वाधिक महत्व दिया गया है मांगलिक कार्यों में इसका प्रयोग सिंदूर रोली या कुमकुम के रूप में किया जाता है लाल रंग सौर्य एवं विजय का प्रतीक है लाल रंग प्रेम रोमांस और साहस को भी दर्शाता है धार्मिक महत्व के अलावा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाल रंग को सही माना जाता है लाल रंग व्यक्ति के शरीर एवं मानसिक स्तर को शीघ्र प्रभावित करता है यह रंग शक्तिशाली एवं मौलिक है यह साहस पराक्रम बल और शक्ति के लिए जाना जाता है यही कुछ कारण है जो स्वास्तिक बनाते समय केवल लाल रंग के उपयोग की ही सलाह दी जाती है

तो दोस्तों यह थी जानकारी स्वास्तिक चिन्ह से संबंध में आपको हमारा यह पोस्ट ‘स्वास्तिक के चिह्न को किसने बनाया ? स्वास्तिक का रहस्य Swastika Symbol Mystery in Hindi ‘ कैसा लगा हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं। धन्यवाद॥

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