गरुड़ पुराण क्या है What is Garuda Purana in Hindi

What is Garuda Purana in Hindi

What is Garuda Purana in Hindi: दोस्तो आज हम आपको अपनी इस पोस्ट में बदला रहे हैं गरुड़ पुराण के बारे में… कि क्या है गरुड़ पुराण? दोस्तों पुराण साहित्य में गरुड़ पुराण का प्रमुख स्थान है। गरुड़ पुराण में 289 अध्याय तथा उसमें 18000 श्लोक हैं। इस पुराण में मृत्यु के पश्चात की घटनाओं प्रेत लोग, यमलोक, नरक तथा 8400000 योनियों के नरक स्वरूपी जीवन आदि के बारे में विस्तार से हम सबको बतलाया गया है। साधारण लोग इस पुराण को पढ़ने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि इस पुराण को किसी परिचित की मृत्यु होने के बाद ही पढ़ाया जाता है। What is Garuda Purana in Hindi

दोस्तों सनातन धर्म में यह मान्यता है की मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण कराने से जीव को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। इस पुराण के अनुसार प्रेत योनि में भोग रहे व्यक्ति के निमित्त गरुड़ पुराण करवाने से उसे आत्मशांति की प्राप्ति होती है और वह जीव प्रेतयोनि से मुक्त हो जाता है। साधारण शब्दों में कहें तो गरुड़ पुराण में प्रेतयोनि एवं नरक की योनि से बचने के उपाय बताए गए हैं। इनमें से प्रमुख उपाय हैं दान दक्षिणा, पिंडदान, श्राद्ध, कर्म इत्यादि बताए गए हैं। इस पुराण के अनुसार मरने वाले व्यक्ति की आत्मा की सद्गति हेतु पिंड और दानादि एवं उसका श्राद्ध कर्म करना अत्यंत आवश्यक बताया गया है, जिससे कि मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को सदगति की प्राप्ति हो सके। और यह उपाय पुत्र के द्वारा अपने मस्तक पिता के लिए किया जाता है। क्योंकि पुत्र ही तर्पण या पिंड दान करके पुननामक नरक से पिता को बचाता है। पुत्र अपने पिता को मुखाग्नि देकर अपने पिता को पैतष्क ऋण से मुक्त कराता है।

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दोस्तों यह यैसा प्रश्न है जिसका उत्तर जानने की इच्छा दुनिया में सभी को होती है। और सभी अपने अपने तरीके से इसका उत्तर भी देते हैं। गरुड़ पुराण भी इसी प्रश्न का उत्तर देता है, इस पुराण के अनुसार मनुष्य अपने जीवन में शुभ-अशुभ, पाप-पुण्य, नैतिक-अनैतिक जो भी कार्य करता है गरुड़ पुराण में उसे तीन भागों में बांटा गया है।

पहली अवस्था में मनुष्य अपने शुभ अशुभ, अच्छे बुरे कर्मों को इसी लोक में भोग लेता है।

दूसरी अवस्था में मृत्यु के उपरांत मनुष्य विभिन्न 8400000 योनियों में से किसी एक में अपने कर्म के अनुसार जन्म लेता है।

तीसरी अवस्था कोई भी मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार मरने के बाद स्वर्ग और नर्क को प्राप्त करता है।

गरुड़ पुराण के अनुसार जो भी व्यक्ति दूसरे की संपत्ति को हड़प्पा है,अपने मित्र के साथ विश्वासघात करता है, ब्राह्मणों की संपत्ति से अपना पालन करता है, पराई स्त्री या पर पुरुष से व्यभिचार करता है, मंदिर से धन चुराता है, जो अपनी निर्दोष माता, बहन, पुत्री, स्त्री पुत्रवधू, पुत्र इन्हें किसी भी कारण के त्यागता है, निर्बल को सताता है ऐसे मनुष्य को मरने के बाद उसे भयंकर नरक योनि में जाना पड़ता है। और उस नरक से उसकी कभी भी मुक्ति नहीं होती है। इस संसार में भी ऐसे पापी व्यक्ति को अनेक रोग और कष्ट घेर लेते हैं और उसका जीवन बड़ा ही कष्टदायक हो जाता है। अंत समय में उसका प्राण बहुत ही कष्ट से निकलता है, तथा मरने के पश्चात वह भयंकर प्रेत योनि में चला जाता है। What is Garuda Purana in Hindi

शीघ्रंप्रचलदुष्टात्मन् गतोऽसित्वं यमायलं

                                 कुम्भीपाकादिनरकात्वं नेष्यामश्च माचिम्               (गरूड़ पुराण)

दोस्तों इस श्लोक का अर्थ है दुष्ट एवं पापी व्यक्ति को पकड़कर यमदूत कुंभीपाक आदि नरकों में कोड़े मारते हुए और उसे घसीटते हुए ले जाते हैं। और नर्क में ले जाकर उसे पास से बांध देते हैं। वह मनुष्य वही भूख-प्यास से अत्यंत व्याकुल होकर दुख से कराहता है और रोता है। उस समय उस मनुष्य ने जो अपने जीवन मैं दान अथवा स्वजनों द्वारा उस मनुष्य के मरते समय दिए गए पिंडदान को वह खाता है, तब भी उस मनुष्य की तृप्ति नहीं होती। वह मनुष्य अगर अपने जीवन में मांस भक्षण करता है, तो उस नर्क में सभी जीव उस मनुष्य को आकर मिलते हैं जिनका उसने अपने जीवन में मांस भक्षण किया था, और वह सारे जीव वहां उसके मांस को नोचते हैं तथा वह कई कल्पों तक उसी प्रेत योनि में भटकता रहता है।

गरूड़ पुराण में महर्षि कश्यप और तक्षक नाग को लेकर एक कथा है

दोस्तों कथा के अनुसार जब ऋषि के श्राप से प्रेरित तक्षक नाग राजा परीक्षित को डसने जा रहे थे तब मार्ग में उन्हें महर्षि कश्यप मिल जाते हैं। तब तक्षक नाग एक ब्राह्मण का वेश बनाकर ऋषि कश्यप से मिलते हैं, और उनसे पूछते हैं कि आप कहां जा रहे हैं? तब ऋषि कश्यप ने कहा कि तक्षक नाग राजा परीक्षित को डसने जा रहा है। और मेरे पास ऐसी विद्या है कि मैं राजा परीक्षित को पुनः जीवन दान दे दूंगा। जब तक्षक नाग ने ऋषि कश्यप की यह बात सुनी तब उन्होंने अपना परिचय दिया कि ऋषिवर मैं ही तक्षक नाग हूं, और मेरे विष के प्रभाव से आज तक कोई नहीं बचा सका है। तब ऋषि कश्यप ने कहा कि मैं अपने मंत्र शक्ति के मदद से राजा परीक्षित को पुनः जीवित कर दूंगा। इस पर तक्षक ने कहा ऋषिवर अगर ऐसी बात है तो आपके मंत्र की शक्ति को मैं परखना चाहता हूं। मैं यहां पर लगे एक हरे भरे वृक्ष को भस्म कर देता हूं आप उसे फिर से हरा-भरा करके दिखाइए। और वही पर लगे एक वृक्ष पर तक्षक नाग ने अपनी डंक मारी, वह हरा-भरा वृक्ष विष के प्रभाव से जलकर भस्म हो गया। तब ऋषि कश्यप ने अपने कमंडल से अपने हाथ में जल लेकर मंत्रोच्चारण करते हुए वृक्ष की राख पर छीट मारा, तो वह वृक्ष अपने स्थान पर फिर से हरा-भरा होकर अपने स्थान पर खड़ा हो गया। What is Garuda Purana in Hindi

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यह सब देख कर तक्षक नाग को बड़ा ही आश्चर्य हुआ, और उन्होंने ऋषि कश्यप से पूछा कि ऋषिवर आप वहां क्यों जा रहे हैं? तब ऋषि कश्यप ने कहा कि जब मैं अपनी मंत्र शक्ति से राजा परीक्षित को जीवित कर दूंगा, तब राजा परीक्षित हमें बहुत सारा धन देंगे। तब तक्षक ने कश्यप ऋषि को संभावना से ज्यादा धन देकर विदा करना चाहा, लेकिन कश्यप ऋषि को यह उचित नहीं लगा,और उन्होंने धन लेने से इनकार कर दिया। तब वहीं पर तक्षक नाग ने ऋषि कश्यप को गरुड़ पुराण की कथा सुनाई। जिससे ऋषि कश्यप को ज्ञान हुआ कि जिसने जो कर्म किया है, वह अवश्य ही उसका फल भी भोगेगा। और वह किसी के बचाने से नहीं बच सकता।

दोस्तों वास्तव में गरुड़ पुराण सुनने से मनुष्य को सच्चे ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है, और वह बुरे कर्म करने से बचता है तथा उसे जीवन का यथार्थ ज्ञान मिलता है।

तो दोस्तों आपको हमारा यह पोस्ट What is Garuda Purana in Hindi कैसा लगा कमेंट के माध्यम से हमे जरूर बताएं

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