श्रीमद भगवद गीता क्या है what is srimad bhagavad gita

what is srimad bhagavad gita

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आज हम आपको अपने पोस्ट में श्रीमद भगवद गीता के बारे में बताने जा रहे हैं। कि आखिर श्रीमद भगवद गीता है क्या? what is srimad bhagavad gita

क्या आप जानते हैं कि श्रीमद भगवद गीता आखिर है क्या? what is srimad bhagavad gita और हमारे दैनिक जीवन में श्रीमद भगवद गीता का आखिर क्या महत्व है? असल में दोस्तों आप इसे आधुनिक अंग्रेजी शिक्षा का प्रभाव कहिए या फिर धर्म के प्रति कुलकूटों की उदासीनता लेकिन यह एक कड़वा सत्य है,कि हमारे हिंदू धर्म के लोगों में ही अपने हिंदू धर्म और धर्म ग्रंथों की जानकारी नहीं के बराबर है। और दोस्तों यही सबसे बड़ा कारण है कि आज लोग हिंदू धर्म को मानने के स्थान पर सेकुलर बनते जा रहे हैं। जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं होता है। और ऐसे लोग खुद की कुंठा जिज्ञासा को मिटाने के लिए सभी धर्मों को एक समान बताते फिरते हैं,ताकि कोई भी व्यक्ति उनसे उनके धर्म ग्रंथों के बारे में ना पूछ ले।

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दोस्तों आश्चर्य की बात तो यह है कि,आजकल के लोगों और नव युवकों को आई लव यू या आई मिस यू जैसे शब्द बोलने के तो 50 तरीके मालूम होते हैं। लेकिन जब उनसे अपने परम पवित्र वेद अथवा श्रीमद भगवद गीता के बारे में पूछा जाता है,तो उन्हें इसके बारे में सिर्फ इतना ही पता है कि यह हमारे कोई धर्म ग्रंथ हैं, जोकि हम सबके घर के पूजा स्थान में रखा जाता है।

और यह हमारे हिंदू समाज के लिए काफी चिंता का विषय है। क्योंकि आज जो युवा हैं,कल वही आगे चलकर बुजुर्ग होंगे। और यदि उन्हें ही अपने धर्म और पुराण के बारे में कुछ मालूम नहीं होगा। तो वह अपने आने वाले पीढ़ी को उनके धर्म और धर्म ग्रंथों के बारे में क्या बता पाएंगे, नाही अपने आने वाली पीढ़ी का चरित्र निर्माण कर पाएंगे।

इसलिए आज आप जानिए हमारे परम पवित्र श्रीमद भगवद गीता के बारे, में कि आखिर श्रीमद भगवद गीता है क्या? what is srimad bhagavad gita और इसका क्या महत्व है?

साधारण शब्दों में अगर श्रीमद भगवद गीता के बारे में कहा जाए तो हम सब कह सकते हैं, कि यह मानव जीवन से संबंधित ज्ञान का एक संकलन है, सागर है। जो हम सबको जीवन जीने की सच्ची प्रेरणा देता है। और हमें धर्म और अधर्म के बारे में विस्तार से बतलाता है।

श्रीमद भगवद गीता का दिव्य ज्ञान महाभारत के युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने अपने सखा कुंती पुत्र अर्जुन को सुनाई थी जब अर्जुन महाभारत के युद्ध में विचलित होकर अपने कर्तव्य से विमुख हो रहे थे।

धर्म ग्रंथों के आंकड़े अनुसार भागवत गीता का उपदेश भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को आज से लगभग 7000 साल पहले सुनाई थी। और इसकी खासियत यह है किया यह दिव्य ज्ञान आज के दिन में भी उतना ही प्रासंगिक और उपयोगी है। और तब तक प्रसांगिक रहेगा जब तक इस धरती पर मानव जीवन का अस्तित्व रहेगा।

भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद भगवद गीता का दिव्य ज्ञान कुरुक्षेत्र के रणभूमि में रविवार के दिन सुनाया था। और उस दिन एकादशी थी। इसलिए हमारे हिंदू धर्म में एकादशी का इतना ज्यादा महत्व है।

धर्म ग्रंथों के अनुसार गीता उपदेश भगवान श्री कृष्ण के द्वारा अर्जुन को लगभग 45 मिनट तक सुनाई गई थी।और भगवान ने यह गीता का ज्ञान कर्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढ़ियों को धर्म ज्ञान सिखाने के लिए दिया था। ताकि धरती पर आगे आने वाली पीढ़ियां अर्जुन की ही तरह अपने कर्तव्य पथ से ना हटे,और सदा धर्म के मार्ग पर ही चले,धर्म का साथ दें।

श्रीमद भगवद गीता में कुल 18 अध्याय है,और 18 अध्यायों में 700 श्लोक हैं।

जिसमें मुख्य रुप से भक्ति और कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गई है। और यह भी बताया गया है कि इन मार्गों पर चलने से हर व्यक्ति निश्चित ही परमपद जीवन में सफलता का अधिकारी बन जाता है।

श्रीमद भगवद गीता का उपदेश जब भगवान श्रीकृष्ण अपने सखा अर्जुन को दे रहे थे, तो यह दिव्य ज्ञान अर्जुन के अलावा सिर्फ धृतराष्ट्र एवं संजय ने ही सुना था। और दोस्तों आपको यह जानकर शायद बेहद ही आश्चर्य होगा कि अर्जुन से पहले यह गीता उपदेश भगवान सूर्य देव को दिया गया था।

श्रीमद भगवद गीता की गिनती हमारे हिंदू उपनिषदों में होती है जोकि हमारे हिंदू के धर्म ग्रंथ हैं। और जिनमें जीवन के विभिन्न पहलुओं और जीवन जीने के तरीकों के बारे में हम सबको बताया गया है।साथ ही श्रीमद भगवद गीता दुनिया के सबसे बड़े महाकाव्य महाभारत के 1 अध्याय शांतिपर्व का एक हिस्सा है।

दोस्तों श्रीमद भगवद गीता का ही दूसरा नाम गीता उपनिषद भी है।

श्रीमद भगवद गीता के प्रमुख सार यह है की… हर मनुष्य को किसी भी परिस्थिति में घबराना नहीं चाहिए, ना ही उसे अपने कर्तव्य पथ से विचलित होना चाहिए… क्योंकि अंत में जीत सदा सर्वदा सत्य (धर्म) की ही होती है। और परिवर्तन ही संसार का नियम है यही शास्वत सत्य है। जो हमेशा कायम रहता है… और रहेगा। what is srimad bhagavad gita

दोस्तों श्रीमद भगवद गीता में कुल 700 श्लोक हैं। जिसमें से भगवान श्री कृष्ण ने 574 श्लोक, अर्जुन ने 85 श्लोक, धृतराष्ट्र ने 1 श्लोक, तथा संजय ने 40 श्लोक कहे हैं।

श्रीमद भगवद गीता का ज्ञान दिव्य है,और अनमोल भी। इसलिए हम सभी को श्रीमद भगवद गीता को पढ़ना चाहिए और उसमें बताए गए उपदेशों को अपने जीवन में पालन करना चाहिए।

तो फिर प्रेम से बोलिए जय श्री कृष्ण

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7 COMMENTS

  1. आपने मेरे दिल की बाद बोल दी एडमिन जी, मेरा सबसे पसंदीदा ग्रन्थ है श्रीमद्भगवद्गीता। क्योंकि मेरे अंदर जो सवाल थे मुझे उन सबका जवाब मिला है। आत्मा, परमात्मा, स्वर्ग, नर्क,धर्म, अधर्म, सुख, दुःख, पाप, पुण्य, देवी-देवता, पूजा, भक्ति,रिश्ते, नाते, अपने, पराये, जन्म, मृत्यु, कर्म, प्रकृति, प्रारब्ध, पुनर्जन्म, कोई भी ऐसा विषय नहीं है जो भगवद गीता में छूटा हो, इसलिए इस दिव्या ज्ञान में तिनके भर का भी संदेह नहीं है,

  2. Comment:Shrimad Bhagwatgita is a complete store of knowledge not only for Hindus but for whole the Humanity, if read for hundreds of times, giving vast Gyan on each reading.

  3. very nice post!.because this post remember to people for moral obligation. as well as this post not only giving ,remember of our moral obligation but also it help to learn cerimuni ,which are coming for a nciant time..

    thanks you for uploaded this type post.

    i hope you will upload this type inspirational story .

  4. में गीता पढ़ कर जरा असमंजस में पड़ा हूँ कृपया मेरी समस्या का समाधान करे , कहते है गीता श्री कृष्ण जी ने ५ ००० या ७००० वर्ष पहले द्वापर में सुनाई थी यह गीता ज्ञान हम मनुषोंको इस लिए दिया गया की जब जब धर्म की अति ग्लानि होती है तब तब में धर्म की रक्षा करने प्रकट होता हूँ अर्थात अधर्म का विनाश और सत्धर्म की स्थापना फिर भी द्वापर युग बाद यह कलियुग क्यों भगवान गीता कहकर गए फिर भी पापाचार ,अत्याचार ,व्यभिचार ,भ्रस्टाचार की यह परम सिमा क्यों आयी ? दूसरी बात अध्याय ७ श्लोक २५
    ” नाहं प्रकाश : सर्वस्य योगमायासमावृत : ।
    मूढो यं नाभिजानाती लोको मामजमव्ययम ।। अर्थात भगवान ने क्यों कहा की में मूढ़ और अज्ञानी लोगोको कभी प्रकट नहीं होता मेरे अंतरंग शक्ति के द्वारा में उनसे अप्रकट रहता हूँ इसलिए मैं अजन्मा हु और अच्युत हूँ । लेकिन श्री कृष्ण जी ने तो जन्म लिया था (गीता भी एक गीतोपनिषद है ) फिर श्वेत श्वतारा उपनिषद ने क्यों कहा की ,” नाकांस्य कस्कीज जनिता न काधिप “अर्थात उस भगवान के कोई माँ और बाप नहीं और उसी उपनिषद में अध्याय ४ श्लोक १९ में क्यों कहा की , “न तस्य प्रतिमा आस्ति ” अर्थात उसका कोई रूप और प्रतिमा नहीं है जब की श्री कृष्ण जी तो साकार थे ,तीसरा ब्रम्हसूत्र भी कहता है ” एकम ब्रम्ह द्वितीय नास्ति नेह नास्ति “अर्थात केवल एक ईश्वर के शिवाय और कोई भगवान नहीं है गीता का और श्लोक ९ अध्याय ८
    ” कविं पुराणमनुशसितारमनोरनियासमनुस्मरेध्य:।
    सर्वस्य धातारामचिन्त्यरूपमादित्यवर्ण तमस : परस्तात ।।
    अर्थात जो सर्वज्ञ है पुरातन है अनुशासक है जो अनु से भी सूक्ष्म है जो सर्व का पालनकर्ता है जो अचिन्त्य रूप है जो सूर्यप्रकाश की भाटी हमें अज्ञान अंधेर से ज्ञान प्रकाश की और ले जाता है उसी का चिंतन मनुष्य ने करना चाहिए यहां तो ज्योतिरप्रकाश सूक्ष्म से सूक्ष्म की बात हो रही है जैसे मुसलमानो ने खुदा नूर कहा और खिचन ने गॉड इज लाइट कहा और हिन्दू ने ज्योतिर स्वरूपं कहा महाईश्वर तो वह है जिसे प्रत्यक्ष ,अप्रत्यक्ष रूप से सभी धर्म स्वीकार करे जो सतचित आनंद स्वरूपं हो कल्याणकारी हो वह तो शिव है जिसे ही सत्यम शिवम् सुंदरम कहते है जो ज्योतिर्स्वरूपम और अजन्मा है फिर सवाल यह उठता की आखिर गीता किसने सुनाई कृपया मार्गदर्शन करे

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