जानिए महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 18 पुराणों के बारें में…

what is purana in hindi

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हमारे हिंदू धर्म ग्रंथों में विश्व की उत्पत्ति से लेकर जन्म मृत्यु का पूरा रहस्य वर्णित है। हमारे पुरान हिंदुओं के धर्म संबंधी आख्यान ग्रंथ हैं। हमारे इन पुराणों में सृष्टि प्राचीन ऋषि मुनियों और राजाओं के समस्त वृत्तांत वर्णित है। दोस्तों साधारण शब्दों में कहें,तो वैदिक काल के पश्चात के वे ग्रंथ जो स्मृति विभाग में आते है…उन्हें ही पुराण कहते हैं। भारतीय जीवन धारा में जिन ग्रंथों का स्थान सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है उन्हें ही हमारे धर्म वेद और पुराण कहते हैं what is purana in hindi महर्षि वेदव्यास जी द्वारा रचित 18 पुराणों में अलग-अलग देवी-देवताओं को केंद्र मानकर पाप-पुन्य,धर्म-अधर्म,कर्म और अकर्म की गाथाएं लिखी गई है। तो कुछ पुराणों में सृष्टि के आरंभ से लेकर अंत तक की विवरण लिखी गई है।

दोस्तों पुराण शब्द का अर्थ होता है प्राचीन कथा। पुरान हमारे विश्व साहित्य के प्राचीनतम ग्रंथ है, जो अपने में ना जाने कितने रहस्य और ज्ञान के सागर को समेटे हुए हैं। उन पुराणों में लिखित ज्ञान और नैतिकता की बातें आज भी प्रासंगिक,अमूल्य तथा हमारे मानव सभ्यता की आधारशिला है। दोस्तों वेदों की भाषा तथा उसकी शैली थोड़ी कठिन है। लेकिन पुराण मैं उसी ज्ञान को सहज और रोचक तरीके से वर्णित किया गया है। वेदों में जटिल तथ्यों को कथाओं के माध्यम से समझाया गया है। लेकिन पुरानों का विषय नैतिकता, विचार राजनीतिक,संस्कृति, सामाजिक, भूगोल, खगोल,सामाजिक परंपराएं,विज्ञान तथा अन्य विषय है।

पुराणों में दुनिया के सबसे प्राचीन वह पवित्र हिंदू धर्म तथा हमारे देवी देवताओं का बहुत अच्छा वर्णन है। इन पुराणों में सैकड़ों सालों से चले आ रहे हैं पौराणिक मिथकों और कथाओं को भी वर्णित किया गया है। ऐसा कहा जाता है की जगत के रचयिता अर्थात ब्रह्मा जी ने सर्वप्रथम जिस प्राचीनतम धर्म ग्रंथ की रचना की थी, उसे ही पुराण के नाम से जाना जाता है। what is purana in hindi

लेकिन हमारे धर्म ग्रंथ बतलाते हैं, कि महर्षि वेदव्यास जी ने 18 पुराणों का संस्कृत भाषा में संकलन किया,अर्थात उनकी रचना की। पुराणों के मुख्य देव ब्रह्मा,विष्णु तथा महेश हैं। हिंदू धर्म में ब्रम्हा,विष्णु,महेश को त्रिदेव कहा जाता है। त्रिमूर्ति के प्रत्येक भगवान के स्वरूप को 6 पुराण समर्पित किए गए हैं। दोस्तों आज हम आपको अपने इस पोस्ट में बतलाने जा रहे हैं… कि पुराण कितने हैं? उनके नाम क्या क्या है? और उन पुराणों में श्लोकों की संख्या कितनी है?

दोस्तों पुराणों की संख्यां 18 है। और इसके रचयिता महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास हैं।

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1. ब्रह्म पुराण (Braham Purana) – इस पुराण में 246 अध्याय  तथा 14000 श्लोक हैं,

2. पद्म पुराण (Padma Purana) – इस पुराण में 5 खंड तथा 55000 श्लोक हैं,

3. विष्णु पुराण (Vishnu Purana) – इस पुराण में 6 अँश तथा 23000 श्लोक हैं,

4. शिव पुराण (Shiva Purana) – इस पुराण में सात संहिता तथा 24000 श्लोक हैं,

5. भागवत पुराण (Bhagwata Purana) – इस पुराण में 12 स्कंध तथा 18000 श्लोक हैं,

6. नारदपुराण (Narad Purana) – इस पुराण के दो भाग हैं तथा 25000 श्लोक हैं,

7. मार्कण्डेय पुराण (Markandeya Purana) – इस पुराण में 137 अध्याय तथा 9000 श्लोक हैं,

8. अग्नि पुराण (Agni Purana) – इस पुराण में 383 अध्याय तथा 15000 श्लोक हैं,

9. भविष्य पुराण (Bhavishya Purana) – इस पुराण में 129 अध्याय तथा 28000 श्लोक हैं,

10. ब्रह्मवैवर्त पुराण(Brahma Vaivarta Purana)- इस पुराण में 218 अध्याय तथा 18000 श्लोक हैं,

11. लिंग पुराण (Linga Purana) – इस पुराण में 163 अध्याय तथा 11000 श्लोक हैं,

12. वराह पुराण (Varaha Purana) – इस पुराण में 217 स्कन्ध तथा 10000 श्लोक हैं,

13. स्कन्द पुराण (Skanda Purana) – इस पुराण में 6 खण्ड तथा 81000 श्लोक हैं,

14. वामन पुराण (Vamana Purana) – इस पुराण में 95 अध्याय,दो खण्ड तथा 10000 श्लोक हैं,

15. कुर्मा पुराण (Kurma Purana) – इस पुराण में 4 खण्ड तथा 18000 श्लोक हैं,

16. मतस्य पुराण(Matsya Purana) – इस पुराण में 290 अध्याय तथा 14000 श्लोक हैं,

17. गरुड़ पुराण (Garuda Purana) – इस पुराण में 279 अध्याय तथा 18000 श्लोक हैं

18. ब्रह्माण्ड पुराण (Brahmanda Purana) – इस पुराण में 3 भाग तथा 12000 श्लोक हैं,

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